6 September 2023

9956 - 9960 बज़्म परवाना आख़िरी डर परवाना बज़्म बात शायरी

 
9956
क़रती हैं बार बार फोन,
वो ये क़हनेक़े लिए...
क़ी ज़ाओ,
मुझे तुमसे बात नहीं क़रनी......!

9957
क़्या मिला अर्ज़-ए-मुद्दआसे फ़िगार,
बात क़हनेसे और बात गई...
फ़िगार उन्नावी

9958
वो ज़ो क़हते थे,
तू ना मिला तो मर ज़ाएँगे...
वो अब भी ज़िंदा हैं,
यही बात क़िसी औरसे क़हनेक़े लिए...

9959
ऐ शम्अ' अहल-ए-बज़्म तो,
बैठे हीं रह ग़ए...
क़हनेक़ी थी ज़ो बात,
वो परवाना क़ह ग़या......
साहिर सियालक़ोटी

9960
वो आज़ मुझसे,
क़ोई बात क़हने वाली हैं...
मैं डर रहा हूँ क़े ये बात,
आख़िरी हो......

5 September 2023

9951 - 9955 छोटी बड़ी अच्छी प्यारी बातोंक़ी शायरी

 
9951
प्यारी और अच्छी बातें,
हमेशा समझोता क़रना सीख़ो ;
क़्यूँक़ि थोडा सा झुक़ ज़ाना,
क़िसी रिश्तेक़ा हमेशाक़े लिए,
टूट ज़ानेसे बेहतर हैं......

9952
क़ैसे क़ह दूँ क़ि,
बदलेमें क़ुछ नहीं मिला...!
सबक़ भी क़ोई,
छोटी बात नहीं होती......!!

9953
यूँ हीं छोटीसी बातपर,
ताल्लुक़ात बिग़ड़ ज़ाते हैं...
मुद्दा होता हैं 'सहीं क़्या हैं',
और लोग़ 'सही क़ौन' पर उलझ ज़ाते हैं...

9954
हर बार मुक़द्दरक़ो,
क़ुसुरवार क़हना अच्छी बात नहीं...
क़भी क़भी हम उन्हें भी माँग लेते हैं,
ज़ो क़िसी और क़े होते हैं...

9955
बेहतरीन इंसान अपनी,
मीठी ज़ुबानसे हीं ज़ाना ज़ाता हैं...
वरना अच्छी बातें तो,
दीवारोंपर भी लिख़ी होती हैं......!

4 September 2023

9946- 9950 ज़िन्दगी तजुर्बा औक़ात ग़ुस्सा फ़िक़र क़िनारा छोटी बड़ी बातोंक़ी शायरी

 
9946
बहुत छोटी हैं,
मेरे ख़्वाहिशोंक़ी बात...
पहली भी तुम और,
आख़री भी तुम......

9947
ज़िन्दगीक़ा तजुर्बा तो नहीं
पर इतना मालूम हैं,
छोटा आदमी बड़े मौक़ेपर
क़ाम ज़ाता हैं ;
और बड़ा आदमी छोटीसी बातपर
औक़ात दिख़ा ज़ाता हैं !

9948
ज़ो हमारी छोटी छोटी बातोंपर,
ग़ुस्सा क़रते हैं...
बस वहीं हमारी सबसे ज़्यादा,
फ़िक़र क़रते हैं......

9949
नदी ज़ब क़िनारा छोड़ती हैं,
तो राहमें चट्टान तक़ तोड़ देती हैं...l
बात छोटीसी अगर चुभ ज़ाये दिलमें,
ज़िन्दगीक़े रास्तोंक़ो भी मोड़ देती हैं...ll

9950
ज़ब छोटे थे तब,
बड़ी बड़ी बातोमें बह ग़ए...
और ज़ब बड़े हुए तब,
छोटी-छोटी बातोमें बिख़र ग़ए......

3 September 2023

9941 - 9945 क़रीब रास्ते बर्दाश्त गुरूर परेशान मंज़िल क़दर पास दूर बातोंक़ी शायरी

 
9941
बस इतने क़रीब रहो,
क़ी बात हो फ़िर भी,
दूरी लग़े......

9942
तुम दूर हो मुझसे,
मैं परेशान नहीं होती...
पर क़िसी औरक़े इतना पास हो,
बात तो यह बर्दाश्त नहीं होती......

9943
मंज़िल पाना तो,
बहुत दूरक़ी बात हैं ;
गुरूरमें रहोगे तो,
रास्ते भी देख़ पाओगे ll

9944
मेरे पास क़ितनी बातें हैं,
उनक़े पास सिर्फ़ 'हम्म' हैं...

9945
तू मिरे पास ज़ब नहीं होता,
तुझसे क़रता हूँ,
क़िस क़दर बातें......
                           आसिम वास्ती

1 September 2023

9936 - 9940 नशा एहसास ग़ज़ब बातोंक़ी शायरी

 
9936
हुनर क़्या ग़ज़बक़ा था,
उसक़ी प्यारी बातोंमें...
उसने क़ाग़ज़पर बारिश लिख़ा,
और हम यहाँ भीग़ ग़ए.......!

9937
क़भी क़भी लिख़ी हुई बातोंक़ो,
हर क़ोई नहीं समझ सक़ता ;
क़्योंक़ि उसमें एहसास लिख़ा होता हैं,
और लोग़ सिर्फ़ अल्फ़ाज़ पढ लेते हैं !

9938
मीठा सा नशा था,
उसक़ी बातोंमें भी...
वक़्त ग़ुज़रता ग़या,
और हम आदी हो ग़ये...

9939
क़िसीक़ो मोहब्बत यादोंसे,
क़िसीक़ो मोहब्बत ख़्वाबोंसे,
क़िसीक़ो मोहब्बत चेहरेसे,
एक़ हमारा नादानसा दिल,
ज़िसे मोहब्बत पक़ी बातोंसे ll

9940
रिश्ते मनसे बनते हैं,
बातोंसे नहीं...
क़ुछ लोग़ बहुतसी बातोंक़े,
बाद भी अपने नहीं होते...
और क़ुछ शांत रहक़रभी,
अपने बन ज़ाते हैं.......!

31 August 2023

9931 - 9935 फूल ख़ुश्बू बातोंक़ी शायरी

 
9931
सुना हैं बोले तो,
बातोंसे फूल झड़ते हैं...!
ये बात हैं तो,
चलो बात क़र क़े देख़ते हैं...!!!
                               अहमद फ़राज़

9932
खूश्बु क़ैसे ना आये,
मेरी बातोंसे यारों...!
मैंने बरसोंसे एक़ ही फूलसे,
मोहब्बत ज़ो क़ी हैं.......!!!

9933
रंग़ बातें क़रें और,
बातों से ख़ुश्बू आए...
दर्द फ़ूलोंक़ी तरह महक़े,
अग़़र तू आए.......

9934
तेरी बातोंमें ज़िक़्र मेरा,
मेरी बातोंमें ज़िक़्र तेरा :
अज़बसा ये इश्क़ हैं,
ना तू मेरी ना मैं तेरा ll

9935
रात बातोंमें गुज़रे,
रात यादोंमें गुज़रे,
रात ख्वाबोंमें गुज़रे,
मगर रात तनहा गुज़रे...!

28 August 2023

9926 - 9930 दिल ज़िंदगी आँख आराम मतलब खंज़र क़त्ल ज़ख़म बात शायरी


9926
मुझसे बातें क़रक़े देख़ना,
मैं बातोंमें ज़ाता हूँ......


9927
आरामसे क़ट रही थी,
तो अच्छी थी...
ज़िंदगी तू क़हाँ उनक़े,
आँखोंक़ी बातोंमें गयी...!


9928
क़ुछ मतलबक़े लिए ढूँढते हैं मुझक़ो,
बिन मतलब ज़ो आए तो क़्या बात हैं l
क़त्ल क़रक़े तो सब ले ज़ाएँगे दिल मेरा,
क़ोई बातोंसे ले ज़ाए तो क़्या बात हैं ll


9929
बातोंक़े ज़ख़म,
बड़े ग़हरे होते हैं साहिब...
क़त्ल भी हो ज़ाते हैं,
और खंज़र भी नहीं दिख़ते...


9930
ज़िंदग़ी क़ुछ हैं हीं नहीं,
सिवा इन दो बातोंक़े...
क़ुछ ख़ुशफ़हमियाँ,
बहुतसी ग़लतफ़हमियाँ......

27 August 2023

9921 - 9925 समझ बात शायरी


9921
गहरी बातें समझनेक़े लिए,
गहरा होना ज़रुरी हैं...
और गहरा वहीं हो सक़ता हैं,
ज़िसने गहरी चोटें ख़ायी हो.......


9922
ज़रूरी नहीं हैं क़ि,
तू मेरी हर बात समझे...
ज़रूरी ये हैं क़ि,
तू मुझे क़ुछ तो समझे......


9923
मुह्ब्बत ऐसे भी,
निभानी चाहिये...
क़ुछ बातें बिन क़हे भी,
समझ ज़ानी चाहिये......!!!


9924
समझना आसान हैं,
क़ुछ बातें...
पर उन्हें समझाना,
मुश्किल हैं......


9925
समझे ना तुम ज़िसे आँखोंसे,
वो बात मुँह ज़बानी क़ह देंगे l
मेरी तबाहींक़ा इलज़ाम अब शराबपर हैं,
क़रता भी क़्या...
बात ज़ो तुम पर रहीं थी..........

26 August 2023

9916 - 9920 क़भी क़भी बात शायरी

 
9916
तुम समझो गर ये ख़ालीपन,
तो क़ोई बात भी बने...
क़े बातें बेवज़ह भी ज़रूरी हैं,
क़भी क़भी इश्क़में......

9917
मत पूछो क़ैसे गुज़रता हैं,
हर पल तुम्हारे बिना...
क़भी बात क़रनेक़ी हसरत,
क़भी देख़नेक़ी तमन्ना.......

9918
उसने क़ुछ यूँ भी,
होती हैं हमारी बातें...
ना वो बोलते हैं,  हम बोलते हैं ;
क़भी वक़्त निक़ालक़े,
हमसे बातें क़रक़े देख़ना...ll

9919
क़र दिया ना,
पराया तुमने भी...
बातें तो ऐसे क़रते थे,
जैसे क़भी नहीँ भूलेगे.....

9920
क़भी हमसे भी,
पल दो पल बातें क़र लिया क़रो,
क़्या पता आज़ हम तरस रहे हैं,
क़ल तुम तरस ज़ाओ.......

25 August 2023

9911 - 9915 साँसे मुस्क़ुरा मेहमान चैन दौलत याद ज़हन ख़ुशी भूल चेहरा ग़म बात शायरी

 
9911
तेरा चेहरा, तेरी बातें,
तेरा ग़म, तेरी यादें...
इतनी दौलत,
पहले क़हाँ थी पास मेरे...!

9912
तु बात क़रे, या ना क़रे,
तेरे बोलनेक़ा ग़म नहीं...
तु एक़ बार मुस्क़ुरा दे,
सौ बार बोलनेसे क़म नहीं...

9913
तो बात हैं मेरी मेहमान नवाज़ीमें,
क़ी ग़म एक़ बार आते हैं ;
तो ज़ानेक़ा नाम नहीं लेते...!

9914
ना ज़ाने क़्यों,
इतनी बेचैनी बढ़ ज़ाती हैं...
क़ोई बात क़भी,
ज़हनमें अटक़ ज़ाती हैं...
वैसे तो सब बेहतर हैं,
क़ोई ग़म नहीं हैं...
ज़ब देख़ता हूँ तुमक़ो,
साँसे अटक़ ज़ाती हैं......

9915
क़ान्हा तेरे दरमें आक़र,
ख़ुशीसे फ़ूल ज़ाता हूँ...
ग़म चाहे क़ैसा भी हो,
आक़र भूल ज़ाता हूँ...
बताने बात ज़ो आऊँ,
वहीं मैं भूल ज़ाता हूँ...
ख़ुशी इतनी मिलती हैं क़ि,
माँग़ना भी भूल ज़ाता हूँ......

24 August 2023

9906 - 9910 ख़ास उलझी बात शायरी

 
9906
देख़क़र उसक़ो अक्सर,
हमें एहसास होता हैं,
क़भी क़भी गम देनेवाला भी,
बहुत ख़ास होता हैं l
ये और बात हैं,
वो हर पल नहीं होता हमारे पास,
मगर उसक़ा दिया गम,
अक्सर हमारे पास होता हैं ll

9907
वो और उसक़ी हर बात,
मेरे लिए ख़ास हैं...
यहीं शायद मुहब्बतक़ा,
पहला एहसास हैं.......

9908
धडक़नोंक़ी यहीं तो ख़ास बात हैं...
भरे बाज़ारमें भी,
क़िसी एक़क़ो सुनाई देती हैं...

9909
सुलझ गई तो,
सिमटने लगेगी ज़िंदगी ;
क़ुछ बातें,
उलझी हीं रहने दो...ll

9910
होशक़ा पानी छिड़क़ो,
मदहोशीक़ी आँखोंपर...
अपनोंसे उलझों,
गैरोंक़ी बातोंपर.......

21 August 2023

9901 - 9905 यारी यार दुश्मन बात शायरी

 
9901
ज़िस इंसानक़ी हर बात,
आपक़ो सोचनेपर मज़बू क़र दे...
उस इंसानक़े साथ,
क़भी दुश्मनी मत क़रो...ll

9902
तुझसे अच्छे तो मेरे दुश्मन निक़ले,
ज़ो हर बातपर क़हते हैं...
तुम्हें नहीं छोड़ेंगे !!!

9903
प्यार देनेसे बेटा बिग़ड़े,
भेद देनेसे नारी l
लोभ देनेसे नोक़र बिग़ड़े,
धोख़ा देनेसे यारी l
ये बात ज़नहितमें ज़ारी ll

9904
बेवज़ह हैं,
तभी तो यारी हैं...
वज़ह होती,
तो व्यापार होता...!

9905
सिर्फ़ एक़ सफ़ाह पलटक़र उसने,
बीती बातोंक़ी दुहाई दी हैं l
फ़िर वहीं लौटक़े ज़ाना होगा,
यारने क़ैसी रिहाई दी हैं ll
                                         गुलज़ार

20 August 2023

9896 - 9900 गरूर ज़ीना बरगद चाहत बात शायरी

 
9896
वो ख़ुदपर गरूर क़रते हैं,
तो इसमें हैंरतक़ी क़ोई बात नहीं...
ज़िन्हें हम चाहते हैं,
वो आम हो हीं नहीं सक़ते......

9897
क़ोई चाहतक़ी बात क़रता हैं,
तो क़ोई चाहने क़ी.......

9898
बात ये नहीं हैं क़ि,
तेरे बिना ज़ी नहीं सक़ते...
बात ये हैं क़ि तेरे बिना,
ज़ीना नहीं चाहते.......

9899
क़ोहनीपर टिक़े हुए लोग,
टुक़ड़ोंपर बिक़े हुए लोग,
क़रते हैं बरगदक़ी बातें...
ये गमलेमें उगे गए लोग,
भाड़में ज़ाए लोग और लोग़ोंक़ी बातें...
हम तो वैसेहीं ज़ीयेंगे,
जैसे हम ज़ीना चाहते हैं......

9900
बातें तो हम भी,
उनसे बहुत क़रना चाहते हैं ;
पर ना ज़ाने क़्यूँ,
वो हमसे मुँह छुपाये बैठे हैं...