10731
ज़ाने क़्या ढूंढ़ती हैं,
मेरे मुस्क़ुराहट तुझमें,
ज़ो तू हंसता हैं तो, ये क़मबख़्त,
मेरे होठोंपें आ बैठती हैं !
दिलक़ी हसरत ज़ुबानपें आने लग़ी,
तूने देख़ा और ज़िंदग़ी मुस्क़ुराने लग़ी !
ये इश्क़क़ी इंतहान थी, या दीवानग़ी मेरी,
हर सूरतमें सूरत तेरी नज़र आने लग़ी !
ख़ुशबू और प्यारक़ा रंग़़…
तेरा साथ हो, तेरा संग़…!!
मेरा मुस्क़ुराना, पलक़े ग़िराना और शरमाना,
सूरज़क़ी रोशनी, पर लाली- सी ओढनी…
शाममें ज़ैसे, रातक़ी ठंड़क़,
तेरा साथ हो, तेरा संग़….!!!