7 January 2021

7006 - 7010 दिल इश्क ज़िंदगी नसीब ज़माना ऐश ग़म ख़ुशी शायरी

 

7006
ऐशही ऐश हैं,
न सब ग़म हैं...
ज़िंदगी इक,
हसीन संगम हैं...

7007
जिनके मिलतेही दिलको,
ख़ुशी मिल जाती हैं l
वो लोग क्यों जिन्दगीमें,
कम मिला करते हैं.......ll

7008
बड़े घरोमें रहीं हैं,
बहुत ज़मानेतक...
ख़ुशीका जी नहीं लगता,
ग़रीब ख़ानेमें.......!

7009
मैं बदनसीब हूँ,
मुझको न दे ख़ुशी इतनी...
कि मैं ख़ुशीको भी लेकर,
ख़राब कर दूँगा.......

7010
पता न चला कि,
इश्कके जालमें फँसे कब थे ;
मरते वक्त याद न आया,
कि हँसे कब थे.......ll

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