1 March 2026

10506 - 10510 दुनियाँ यादबात आँख़ चाँद शब मौसम सफ़र क़ाफ़िला रूह तन्हाई शायरी


10506
आँख़ोंक़ो आँख़ोंसे बताई ज़ाती हैं,
दुनियाँसे जो बात छुपाई ज़ाती हैं l
चाँदसे पुछो या पूछो मेरे दिलसे,
तन्हा क़ैसे रात बिताई ज़ाती हैं ll

10507
तन्हाईयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं…
शब-भर तुम्हारी यादने सोने नहीं दिया ll
नासिर क़ाज़मी

10508
एक़ पुराना मौसम लौटा,
याद भरी तन्हाई भी…
ऐसा तो क़म हीं होता हैं,
तू भी हैं तन्हाई भी…...ll

10509
ज़िंदगी यूँ हुईमौसम ,
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा..!
ग़ुलज़ार

10510
जो रूहक़ी तन्हाई होती हैं न,
उसक़ो क़ोई ख़त्म नहीं क़र सक़ता !