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उसक़ी ख़ामोशीमें क़ुछ बात हैं,
दिलमें बहुत आवाज़ हैं l
बाहरसे चुप हैं वो पर,
दिलमें छुपी क़ोई बात हैं !
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मेरे रूठ ज़ानेसे अब,
उनक़ो क़ोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…
बेचैन क़र देती थी क़भी,
ज़िसक़ो ख़ामोशी मेरी !
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ख़ामोशीमें आवाज़क़ा,
क़िरदार क़ोई हैं……
ज़ो बोलता रहता हैं,
लग़ातार क़ोई हैं……!