7 April 2018

2576 - 2580 दिल ख़ामोशी तस्कीन तड़प मुसीबत मोहब्बत लम्हा रूह उदास महक चेहरे याद वक़्त पाकीज़ा निगाह फितूर आईना ग़ुरूर शायरी


2576
ख़ामोशीमें मुसीबत,
और भी संग़ीन होती हैं l
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्कीन होती हैं ll
                           शाद अज़ीमाबादी

2577
तुझसे गुज़रकर मुझतक,
जो एक हसीं लम्हा आया हैं...
उदास पड़ी थी रूह मेरी,
इसने उसको महकाया हैं !!!

2578
कितने चेहरे हैं इस दुनियाँमें;
मगर हमको एक चेहरा ही नज़र आता हैं;
दुनियाँको हम क्या देखें;
उसकी यादोंमें सारा वक़्त गुजर जाता हैं...

2579
कसूर ना उनका था ना हमारा;
हम दोनों ही रिश्तोंकी रसम निभाते रहे;
वो दोस्तीका एहसास जताते रहे;
और हम मोहब्बतको दिलमें छुपाते रहे

2580
तेरी पाकीज़ा निगाहोंमें,
फितूर जाएगा...
आईना मत देख,
तुझमें भी ग़ुरूर जाएगा !

6 April 2018

2571 - 2575 दिल प्यार मोहाब्बत पैगाम उदास आँख एहसास मंजर बेनूर फिजा याद मौसम सुहाना जुर्म शायरी


2571
कभी कभी दिल उदास होता हैं,
हल्का हल्कासा आँखोंको एहसास होता हैं,
छलकती हैं मेरी भी आँखोंसे नमी,
जब तुम्हारे दूर होनेका एहसास होता हैं l

2572
मंजर भी बेनूर थे और,
फिजायें भी बेरंग थी,
बस तुम याद आए और...
मौसम सुहाना हो गया !

2573
हादसों के गवाह हम भी हैं,
अपने दिलसे तबाह हम भी हैं,
जुर्मके बिना सजा-ए-मौत मिली,
ऐसे ही एक बेगुनाह हम भी हैं...!

2574
गुलाब मोहाब्बतका पैगाम नहीं होता,
चाँद चांदनीका प्यार सरे आम नहीं होता,
प्यार होता हैं मनकी निर्मल भावनाओंसे,
वरना यूँ ही राधा-कृष्णका नाम नहीं हो...

2575
तुम देखते रहना यूँ ही,
मुझको ... आँखें भरभरके.......
हम दिवाने हुए...
तेरी इस मोहाब्बतके.......!

4 April 2018

2566 - 2570 इश्क मोहब्बत ज़िन्दगी हसीन खूबसूरत चाहत ग़म ख़ुशी फ़ासले आँधी मेहरबान याद शायरी


2566
अब वफाकी उम्मीद भी,
किसकी की जाए भला,
मिट्टीके ने लोग...
कागजमें जो बिक जाते हैं!

2567
सौ गुना बढ़ जाती हैं,
खूबसूरती महज़ मुस्करानेसे;
फिरभी बाज नहीं आते,
लोग मुँह फुलानेसे

2568
ज़िन्दगी एक हसीन ख़्वाब हैं,
जिसमें जीनेकी चाहत होनी चाहिये।
ग़म खुद ही ख़ुशीमें बदल जायेंगे,
सिर्फ मुस्कुरानेकी आदत होनी चाहिये।

2569
हमारे इश्कका अंदाज,
कुछ अजीबसा था दोस्तों,
लोग इन्सान देखकर मोहब्बत करते हैं,
हमनें मोहब्बत करके इन्सान देख लिया...

2570
फ़ासले तो बढ़ा रहें हो,
मग़र इतना याद रख़ना क़े,
मोहब्बत बार बार इंसानपर.
मेहरबान नहीं होती l

3 April 2018

2561 - 2565 यादें ग़म मौत हुस्न वक़्त आँख आँसू आँचल कफ़न जीभर होश ख़्वाब शायरी


2561
बस जीने ही तो नहीं देगी
और क्या कर लेगी,
तेरी यादें . . . . . . .

2562
ग़म मौतका नहीं ,
ग़म ये के आखिरी वक़्त भी
तू मेरे घर नहीं...
निचोड़ अपनी आँखोंको,
के दो आँसू टपके...
और कुछ तो मेरी लाशको हुस्न मिले...
डाल दे अपने आँचलका टुकड़ा...
के मेरी मय्यतपें कफ़न हीं हैं.......

2563
उसने जी भरके चाहा था मुझे                                           
फिर यूँ हुआ कि...
उसका जी भर गया.......

2564
मेरे गमने,
होश उनके भी खो दिए,
वो समझाते समझाते,
खुद ही रो दिए.......

2565
काश वो सुबह जागते ही
मुझसे लड़ने आते,
की कौन होते हो तुम...
मेरे  ख़्वाबमें आने वाले !!!

2 April 2018

2556 - 2560 दिल दुनियाँ नज़र ज़हर दवा वक़्त रूमानियत करम बेवफ़ाई सैलाब आँख वीरान चाहत साथ अकेले मतलबदिमाग शायरी


2556
वो ज़हर देता तो,
दुनियाँकी नज़रोंमें जाता...
सो उसने यूँ किया के,
वक़्तपें दवा दी.......

2557
मेरे शेरोंमें जो,
रूमानियत आई हैं,
ये तो करम हैं,
तेरी बेवफ़ाईका....

2558
बहा करले गया,
सैलाब सब कुछ...
फ़क़त आँखोंकी,
वीरानी बची हैं.......

2559
उनकी चाहतमें हम,
कुछ यूँ बंधे हैं;
कि वो साथभी नहीं,
और हम अकेले भी नहीं...!

2560
बिना मतलबके दिलसे भी,
नहीं मिलते यहाँ
लोग दिलमें भी,
दिमाग लिए घूमते हैं.......

1 April 2018

2551 - 2555 दिल लफ्ज़ क़रवटें धडकन शक़ तबाही ताबीज आराम ज़िक्र सजदे फर्क हद शायरी


2551
लफ्ज़ उनक़े फ़िर,
क़रवटें ले रहें हैं...
शक़ हैं मुझे,
मेरी फ़िर तबाहीक़ा...

2552
वैसे तो ठीक रहूँगा,
मैं उससे बिछडके...
बस दिलकी सोचता हूँ,
धडकना छोड दे.......

2553
ताबीज़ ज़ैसा था,
वो शख़्स.....
ग़ले लग़ते ही,
सुक़ूँन मिलता था...!

2554
तेरा हुआ ज़िक्र तो...
हम तेरे सजदेमें झुक गये,
अब क्या फर्क पड़ता हैं...
मंदिरमें झुक गये,
या मस्जिदमें झुक गये !!!

2555
वो जिसके लिए हमने,
सारी हदें तोड दी,
आज उसने कह दिया,
अपनी हदमें रहा करो...

31 March 2018

2546 - 2550 चिराग आजमा मुस्कुरा अल्फ़ाज़ ख़ामोश आँसू ख़याल पलक़ हुनर फ़ना पत्थर शायरी



2546
हवासे कह दो कि...
खुदको आजमाके दिखाये;
बहुत चिराग बुझाती हैं,
एक जलाके दिखाये...

2547
मुस्कुराहटें झूठी भी,
हुआ करती हैं यारों...
इंसानको देखना नहीं...
बस समझना सीखो....... !!!

2548
मेरे क़ाबिल दोस्तों.........
दोस्तोंसे रिश्ता रख़ा क़रो ज़नाब,
तबियत मस्त रहेग़ी !
ये वो हक़ीम हैं,
ज़ो अल्फ़ाज़से इलाज़ क़र दिया क़रते हैं !!!


2549
इसी ख़यालसे,
पलक़ोंपें रुक़ ग़ए आँसू 
तिरी निग़ाहक़ो शायद,
सुबूत--ग़म  मिले 
वसीम बरेलवी

2550
क़ैसे मुमक़िन हैं,
ख़ामोशीसे फ़ना हो ज़ाऊँ...
क़ोई पत्थर तो नहीं हूँ,
क़ि ख़ुदा हो ज़ाऊँ...!

27 March 2018

2541 - 2545 दिल प्यार जिंदगी दर्द खुशी कीमत चाह दुनियाँ आदत जख्म लफ्ज़ महसूस एहसास गवाही बदर सवाल जवाब शायरी


2541
दर्द होता जिंदगीमें,
तो खुशीकी कीमत होती.......
अगर चाहनेसे मिल जाता सब कुछ दुनियाँमें
तो ऊपर वालेकी जरूरत होती.......!

2542
दिलमें उतर जानेकी आदत हैं मेरी,
अलग पहचान बनानेकी आदत हैं मेरी,
जितना गहरा जख्म कोई देता हैं मुझे,
उतना ही मीठा मुस्कूरानेकी आदत हैं मेरी...!

2543
कितना प्यार हैं उनसे,
वो लफ्ज़ोके सहारे कैसे बताऊँ,
महसूस करे मेरे एहसास,
गवाही कहाँसे लाऊ.......!

2544
होने दो चराग़ाँ महलोंमें,
क़्या हमक़ो अग़र दीवाली हैं l
मज़दूर हैं हम, मज़दूर हैं हम,
मज़दूर क़ी दुनियाँ क़ाली हैं ll
ज़मील मज़हरी

2545
अकेले रोना भी,
क्या खूब कारीगरी हैं,
सवाल भी खुदका रहता हैं...
और जवाब भी खुदका....

26 March 2018

2536 - 2540 दिल प्यार नज़र जिंदगी दर्द खुशी कीमत दुनियाँ आदत जख्म लफ्ज़ महसूस एहसास गवाही बदर सवाल जवाब शायरी


2536

ये नज़र नज़रक़ी बात हैं
क़ि क़िसे क़्या तलाश हैं
तू हंसनेक़ो बेताब हैं,
मुझे तेरी मुस्क़ुराहटक़ी प्यास हैं।
.

2537
किस्मतसे लड़नेमें मजा रहा हैं !
ये मुझे जीतने नहीं दे रही,
और हार मैं मान नहीं रहा ... !

2538
इतना आसान हूँ कि,
हर किसीको समझ जाता हूँ​;
शायद तुमने ही पन्ने छोड़ छोड़कर,
पढ़ा हैं मुझे

2539
दुआएँ जमा करनेमें लगा हूँ यारों...
... सुना हैं.......
दौलत और शोहरत साथ नहीं जाते...

2540
सोचते हैं कह तो दें ,
हाल--दिल तुमसे...
पर डरते हैं कहीं तुम्हें ,
फिरसे मुहब्बत हों जायें...!

2531 - 2535 शुक्र धोखे लफ्ज ख्याल इंतज़ार धड़कन दर्द खामोश तकदीर जनाजा तमन्ना फुर्सत वक्त आँख शायरी



2531
शुक्र करो की धोखेबाजीका दर्द सहते हैं,
लिखते नहीं.......!
वरना कागजोंपें,
लफ्जोंके जनाजे उठते थे...!!!

2532
चुभता तो बहुत कुछ मुझको भी हैं,
तीरकी तरह.......
मगर खामोश रहता हूँ,
अपनी तकदीरकी तरह.......

2533
मेरी धड़कनोंको छूकर,
और परेशां ना करो,
ये थमसी जाती हैं...
तेरा ख्यालभर जानेसे . . .


2534
इन आँखोंमें तेरे इंतज़ारके सिवा,
कुछ बाकी नहीं...
जान बाकी हैं मगर,
जीनेकी तमन्ना बाकी नहीं...

2535
कहो तो,
थोड़ा वक्त भेज दूँ...
सुना हैं तुम्हें...
फुर्सत नहीं मुझसे मिलनेकी !

25 March 2018

2526 - 2530 दिल दुनियाँ ज़िंदग़ी राख़ दर्द आँख कायर शायर बात अहसास अल्फाज अदालत फैसले मंजूर नाराज शायरी


2526
ये दुनियाँवाले भी,
बडे अजीब हैं...
दर्द आँखोसे निकले तो 'कायर' कहते हैं,
और बातोंसे निकले तो 'शायर' कहते हैं...

2527
ज़िंदग़ी ज़ैसे ज़लानी थी,
वैसे ज़ला दी हमने ग़ालिब....
अब धुएँपर बहस क़ैसी और,
राख़पर ऐतराज़ क़ैसा !!

2528
मेरी लिखी बातोंको,
हर कोई समझा नहीं पाता l
क्योंकि मैं अहसास लिखता हूँ,
और लोग अल्फाज पढते लेते हैं...ll

2529
कागजपें तो,
अदालत चलती हैं,
हमे तो उनकी आँखोके,
फैसले मंजूर हैं.......!

2530
धोखा दिया था जब तूने मुझे,
ज़िंदग़ीसे मैं नाराज था;
सोचा कि दिलसे तुझे निकाल दूं,
मगर कंबख्त दिलभी तेरे पास था...।