24 May 2018

2786 - 2790 दिल अल्फ़ाज़ गहरी शक़्ल याद मंज़र प्यास मंज़िल शख्स महक खुशबू रूह शायरी


2786
क़ाश मैं ऐसी शायरी लिखूं,
तेरी यादमें…
तेरी शक़्ल दिख़ाई दे,
हर अल्फ़ाज़में !!

2787
रख हौंसला वो मंज़र भी आएगा,
प्यासेके पास चलके समंदर भी आएगा,
थक कर बैठ मंज़िलके मुसाफ़िर...
मंज़िल भी मिलेगी, मिलनेका मज़ा भी आएगा !!!

2788
मैं अक्सर ग़मज़दा लोगोंको,
हँसा देता हूँ,
मुझसे कोई मुझसा,
देखा नहीं जाता.......

2789
मुद्दतें हो गयी
कोई शख्स तो अब,
ऐसा मिले फ़राज़।
बाहरसे जो दिखता हो,
अंदर भी वैसा ही मिले...!

2790
खुशबू बनूं तेरी रूहकी,
महका दे तू मुझे l
खो जाऊँ मैं तुझमें,
अपनाले तू मुझे ll

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