6306
चलो आज फेंकते हैं एक कंकड़,
ख्यालोंके दरियामें...
कुछ खलबली तो मचे,
एहसास तो हो, के जिंदा हैं हम...
6307
वजूद शीशेका हो तो,
पत्थरोंसे
मोहब्बत नही किया
करते l
एहसास-ए-चाहत
न मिले तो,
वजूद बिखर जाया
करते हैं...ll
6308
हाथ बेशक छूट गया उसका,
मेरे हाथसे.......
एहसास उसका फंसा हैं आज भी,
उंगलियोंमें मेरी.......
6309
मुद्दतों
बाद उसे किसीके
साथ ख़ुश देखा,
तो ये एहसास हुआ...
काश के हमने
उसे,
बहोत पहले छोड़
दिया होता.......
6310
ज़िन्दगी जीनी हैं तो,
तकलीफें तो होंगी... वरना,
मरनेके बाद तो,
जलनेका एहसास भी नहीं
होता...
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