14 August 2020

6321 - 6325 दिल समझ ज़िंदगी हिम्मत हुनर ज़ख्म शायरी

 

6321
जो दिलमें हैं,
उसे कहनेकी हिम्मत रखिए;
और जो दुसरोंके दिलमें हैं,
उसे समझनेका हुनर रखिए...!

6122
कुछ‪ ‎ज़ख्म इंसानके,
कभी नहीँ‪ भरते...
बस इंसान उन्हें छुपानेका,
हुनर सीख जाता हैं.......!

6323
उसे ये कैसे बताताके,
कुछ तो मैं भी हूँ...
के उसने अपने हुनरसे,
कमाल हैं लिया।.......

6324
वो दौर क़रीब आ रहा हैं,
जब दाद-ए-हुनर न मिल सकेगी...
अतहर नफ़ीस

6325
ज़िंदगी कभी आसान नही होती;
इसे आसान बनाना पढ़ता है...
कुछ को नज़रअन्दाज़ करके,
कुछ को बर्दाश्त कर के हैं...

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