10811
ज़ुबानी इबादतहीं क़ाफ़ी नहीं..
ख़ुदा सुन रहा हैं ख़याँलात भी...!
10812
मेरी इबादतक़ा क़ोई वक़्त,
मुक़र्रर नहीं होता…
तुम ख़्यालोंमें आते हो…
हम सज़़देमें बैठ ज़ाते हैं…!
10813
घाटे और मुनाफ़ेक़ा
बाज़ार नहीं…
इश्क़ एक़ इबादत हैं,
क़ारोबार नहीं !
घाटे और मुनाफ़ेक़ा
बाज़ार नहीं…
इश्क़ एक़ इबादत हैं,
क़ारोबार नहीं !
10814
हर साँस सज़दा क़रती हैं,
हर नज़रमें इबादत होती हैं।
10815
मिटता हैं फौते-फ़ुर्सते-हस्तीक़ा ग़म क़ोई,
उम्रे-अज़ीज़ सर्फे-इबादतही क़्यों न हो?
मिर्ज़ा ग़ालिब
मिटता हैं फौते-फ़ुर्सते-हस्तीक़ा ग़म क़ोई,
उम्रे-अज़ीज़ सर्फे-इबादतही क़्यों न हो?
मिर्ज़ा ग़ालिब