4766
मनको समझाया
था मैने,
इस इश्क़-विश्क़से
दूर रहो;
पर ये मन, मन ही मनमें,
अपनी
"मनमानी" कर बैठा...!
4767
इश्क़की किताबका,
उसुल हैं जनाब...
मुड़कर देखोगे,
तो मोहब्बत मानी जाएगी...!
4768
मेरी बेक़रारी मुझे,
ऐन इबादतसी लग़ती हैं l
मेरे इश्क़पें हैं ईमान,
मेरे सुल्तान पिया l।
4769
इश्क़ क्या,
जिंदगी देगा किसीको...?
ये तो शुरू
ही,
किसीपर मरनेसे होता हैं...!
4770
ये तो अपनी
अपनी जरूरतें,
सजदा करवाती हैं साहब...
वर्ना इश्क़ और खुदामें आज तक,
खुदाको किसने
चुना हैं.......?
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