5 September 2020

6436 - 6440 लब बात मजबूर नजर मुलाक़ाते अज़ान ज़वाब उरूज़ इलाज सनम रूठ शायरी

 

6436
जो भी आता हैं,
बताता हैं नया कोई इलाज...
बंट जाए तेरा,
बीमार मसीहाओंमें...!
                       क़तील शिफ़ाई

6437
मर गए उसके,
लब-ए-जाँ-बख़्शपर...
हमने इलाज,
आप ही अपना किया...!
मोमिन ख़ाँ मोमिन

6438
इलाज ये हैं कि,
मजबूर कर दिया जाऊं...
वरना यूँ तो किसीकी,
नहीं सुनी मैंने.......

6439
मुलाक़ाते उरूज़ पर थी,
तो अज़ानोंक़ा ज़वाब तक़ ना दिया।
सनम ज़ो रूठा तो
नमाज़ी बन बैठे हैं।।

6440
वो चूमकर लबोंको,
हर इलाज भी करती हैं...
वो देखले नजर भर तो,
बीमार भी करती हैं.......!

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