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ख़िलौनेक़ी तड़पमें,
ख़ुद ख़िलौना वो
न बन ज़ाए ;
मिरा बच्चा सड़क़पर,
रोज़ग़ारी लेक़े निक़ला
हैं ll
रऊफ़ ख़ैर
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दिल तड़पता हैं
फ़रियाद क़रक़े,
आँख़ ड़रती हैं
आँसू बहाक़े...
ऐसी उल्फ़तसे वो ज़ाते ज़ाते,
मुझक़ो अपनी क़सम
दे ग़ए हैं
ll
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मज़ा हैं तिरे
बिस्मिलोंक़ो तड़पमें,
तड़पमें नहीं बिस्मिलोंमें
मज़ा हैं ll
क़ैफ़ी हैंदराबादी