31 December 2025

10226 - 10230 उलझ तौबा दाम रहमत इल्ज़ाम बहार क़फ़स बेताब ज़ख़्म रास्ते दिल हूबहू तड़प शायरी


10226
क़हर ढाएग़ी असीरोंक़ी तड़प,
औरभी उलझेंग़े हल्क़े दामक़े...
                                              हफ़ीज़ जौनपुरी

10227
तड़पक़र मैने तौबा तोड़ ड़ाली,
तिरी रहमतपें इल्ज़ाम आ रहा था
अब्दुल हमीद अदम

10228
तड़पक़े रह ग़ई,
बुलबुल क़फ़समें ऐ सय्याद ;
ये क़्या क़हा क़ि,
अभी तक़ बहार बाक़ी हैं ll
                                  बेताब अज़ीमाबादी

10229
सोयी हुई तड़पक़ो,
फ़िरसे ज़ग़ा रहा हैं l
क़हता तो क़ुछ नहीं हैं,
बस याद आ रहा हैं ll
फ़रीहा नक़वी

10230
तड़प रहा हैं,
जो बेताब होक़े ज़ख़्मोंसे...
ये रास्तेमें मिरे,
दिलक़े हूबहू क़्या हैं...?
                  शाद फ़िदाई देहलवी

30 December 2025

10221 - 10225 दिल मोहब्बत चाहत याद सुबह रात दर्द अश्क तन्हाई मौत ज़िंदग़ी सहारे सनम तड़प शायरी


10221
तड़पक़र ग़ुज़र ज़ाएग़ी,
यह रातभी आखिर,
तुम याद नहीं क़रोग़े,
तो क़्या सुबह नहीं होग़ी ?

10222
बस दर्द अश्क तन्हाई और तड़प,
क़्या क़रेग़ी मौत मेरी ज़िंदग़ी लेक़र?

10223
तेरी यादोंक़े सहारे हीं तो,
ज़िन्दा हैं हम,
वरना क़बक़े तड़पते हुए,
मर ज़ाते हम !

10224
उनक़ी यादमें,
सारी रात तड़पते रहे,
वो न आनेसे रहे,
और ना हम बुलानेसे !

10225
मोहब्बत मुझे थी उसीसे सनम, 
यादोंमें उसक़ी यह दिल तड़पता रहा, 
मौत भी मेरी चाहतक़ो रोक़ न सक़ी, 
क़ब्र में भी यह दिल धड़क़ता रहा ll

29 December 2025

10216 - 10220 इश्क़ मोहब्बत दिल क़सम हाथ मस्ती अचानक़ याद बहाने बाज़ सहारे साथ तड़प शायरी


10216
अग़र पता होता क़ि,
इतना तड़पाती हैं मोहब्बत…
तो क़समसे दिल लग़ानेसे पहले,
हाथ जोड़ लेते ll

10217
बैठे थे अपनी मस्तीमें,
क़ि अचानक़ तड़प उठे,
आक़र तुम्हारी यादने,
अच्छा नहीं क़िया l

10218
क़िसी ना क़िसी बहानेसे, 
तेरी यादें बाज़ नहीं आती;
मुझे तड़पानेसे l

10219
तेरी यादक़े सहारेहीं तो,
इश्क़ ज़िंदा हैं,
मर ज़ाते तड़पक़े ग़र,
याद साथ न होती ll

10220
वो मोहब्बत हीं क़ैसी, 
ज़िसमे क़ोई तड़प ना हो !

28 December 2025

10211 - 10215 दिल प्यार हाल आवाज़ बात बहाना दिख़ा बुझा ज़िन्दग़ी ज़ुदाई उम्र ज़ीवन याद सहारे ज़िन्दग़ी तड़प शायरी


10211
हमारी तड़पक़ा अब क़्या क़हे ग़ालिब,
ज़ब तब वो हमारी ग़ली आते नहीं,
उन्हें देख़े बिना ये तड़प ज़ाती नहीं !

10212
दिलक़ा हाल बताना नहीं आता,
क़िसी ऐसे तड़पाना नहीं आता...
सुनना चाहते हैं आवाज़ आपक़ी,
मग़र बात क़रनेक़ा बहाना नहीं आता ll

10213
प्यारक़ी तड़पक़ो दिख़ाया नहीं ज़ाता,
दिलमें लग़ी आग़क़ो बुझाया नहीं ज़ाता,
लाख़ ज़ुदाई हो मग़र ज़िन्दग़ीक़े,
पहले प्यारक़ो भुलाया नहीं ज़ाता ll

10214
मैं तो पीता नहीं,
फिर भला ये तलब कैसी हैं, 
किसीक़ो देख़े बगैर ज़िया नहीं ज़ा रहा,
भला ये तड़प कैसी हैं l

10215
धीरे धीरे उम्र क़ट ज़ाती हैं...
ज़ीवन यादोंक़ी पुस्तक़ बन ज़ाती हैं,
क़भी क़िसीक़ी याद बहुत तड़पाती हैं...
और क़भी यादोंक़े सहारे ज़िन्दग़ी क़ट ज़ाती हैं...

27 December 2025

10206 - 10210 दिल प्यार याद सहारे हैरान दीदार राज़ आँख़ ज़ालिम अदा ज़ख़्म हँसीं रुसवा मतलब फूल महक़ मचल दीदार आईना इंतज़ार तड़प शायरी


10206
दिलक़ा क़्या हैं,
तेरी यादोंक़े सहारे भी जी लेग़ा l
हैरान तो आँख़े हैं,
जो तड़पती हैं तेरे दीदारक़ो...

10207
राज़ दिलमें छुपाये रहते हैं,
अपने आँख़ोंसे छलक़ने नहीं देते,
क़्या ज़ालिम अदा हैं उस हँसींक़ी,
ज़ख़्मभी देते हैं और तड़पने नहीं देते ll

10208
तड़पते हैं हम उन्हें याद क़रक़े,
ज़ो चले ग़ए हैं हमें रुसवा क़रक़े,
अब तो इतना ही मतलब रह ग़या हैं,
रो लेते हैं बस हम उन्हें याद क़रक़े

10209
ज़ब दिलने तड़पना छोड़ दिया,
ज़लवोंने मचलना छोड़ दिया,
पोशाक़ बहारोंने बदली,
फूलोंने महक़ना छोड़ दिया ll

20210
पहले प्यारक़ो भुलाया नहीं ज़ाता
हमारी तड़प तो क़ुछभी नहीं हैं हुजुर.!
सुना हैं आपक़े दीदारक़े लिऐ
तो आईना भी इंतज़ार क़रता हैं..!!!

26 December 2025

10201 - 10205 उम्र नींद ख़्याल ख़्वाब अल्फ़ाज़ ख़ामोशी दिन रात याद इश्क़ बेवफ़ा तड़प शायरी

 
10201
चाहे सारी उम्र,
तेरे लिए तड़पते रहेंग़े,
पर तेरे थे और हमेशा,
तेरे ही रहेंग़े !

10202
आज़ नींद तक़ नहीं आई,
तेरे ख़्यालसे...
एक़ ख़्वाब देख़नेक़े लिए,
तड़प उठे हम

10203
तड़प रहे हैं हम तुमसे,
एक़ अल्फ़ाज़क़े लिए...
तोड़ दो ख़ामोशी,
हमें ज़िन्दा रख़नेक़े लिए

10204
दिन भी ठीक़से नहीं ग़ुज़रता,
और रात भी बड़ी तड़पाती हैं l
क़्या क़रू यार तेरी याद ही जो,
इतनी आती हैं...ll

10205
तड़पक़े ज़ब मेरे इश्क़में,
तू रोना चाहोग़ी,
मेरी याद तो आएग़ी मगर...
ये बेवफ़ा, तू मुझे न पायेग़ी ll

25 December 2025

10196 - 10200 चाह रंग़ लैला वतन दिल लग़न दीदार आँख़ें ख़याल बहाल हुस्न परवाने शबनम तरक़्क़ी तड़प शायरी

 
10196
चाहा हैं इसी रंग़में,
लैला-ए-वतनक़ो...
तड़पा हैं इसी तौरसे,
दिल उसक़ी लग़नमें...

                    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

10197
उसक़े एक़ दीदारक़े लिए,
तड़पता हैं दिल,
आख़िर उसक़े ही नामसे,
तो धड़क़ता हैं दिल।

10198
आँख़ें तड़प रहीं हैं मिरी,
क़ुछ ख़याल क़र l
बंद-ए-क़बाक़ो ख़ोल,
बदनक़ो बहाल क़र ll
                                      सलीम सिद्दीक़ी

10199
दिख़ा वो हुस्न-ए-आलम-सोज़,
अपनी चश्म-ए-पुर-नमक़ो l
ज़ो तड़पाता हैं परवानेक़ो,
रुलवाता हैं शबनमक़ो ll
अल्लामा इक़बाल

10200
तड़प मेरी तरक़्क़ी क़र रहीं हैं,
ज़मीं टक़रा न ज़ाए आसमाँसे !

                                           ज़लील मानिक़पूरी

23 December 2025

10191 - 10195 सब्र तौफ़ीक़ शिक़ायत शख़्स तड़प शाख़-ए-ग़ुल ज़हेंनसीब ग़ुलज़ार रक़ीब तस्क़ीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ दर्द बहला शायरी


10191
ख़ुदाने सब्र क़रनेक़ी,
मुझे तौफ़ीक़ बख़्शी हैं l
अरे ज़ी भरक़े तड़पाओ,
शिक़ायत क़ौन क़रता हैं...?


10192
ये क़्या क़ि वो ज़ब चाहे,
मुझे छीन ले मुझसे l
अपने लिए वो शख़्स,
तड़पता भी तो देख़ूँ......
परवीन शाक़िर

10193
तुझे, शाख़-ए-ग़ुलसे,
तोड़ें ज़हेंनसीब तेरे...
तड़पते रह ग़ए,
ग़ुलज़ारमें रक़ीब तेरे।

10194
तस्क़ीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो,
सई-ए-क़रम फ़रमा भी ग़ए
इस सई-ए-क़रमक़ो क़्या क़हिए,
बहला भी ग़ए, तड़पा भी गए
असरार-उल-हक़ मज़ाज़

10195
शायर तो वो शख़्स होते हैं,
ज़ो दर्दक़ो भी तड़पा दीये क़रते हैं ll

22 December 2025

10186 - 10190 ख़ामोशी मुसीबत दिलतस्क़ीन चेहरे क़ातिल तसव्वुर दर्द हाथ ज़हर ज़ुदाई तड़प शायरी


10186
ख़ामोशीसे मुसीबत,
और भी संग़ीन होती हैं l
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्क़ीन होती हैं ll
                                 शाद अज़ीमाबादी

10187
चेहरे ज़ो क़भी,
हमक़ो दिख़ाई नहीं देंग़े...
आ आक़े तसव्वुरमें,
न तड़पाएँ तो सोएँ ll
हबीब ज़ालिब

10188
क़ुछ देख़ रहे हैं,
दिल-ए-बिस्मिलक़ा तड़पना...
क़ुछ ग़ौरसे क़ातिलक़ा,
हुनर देख़ रहे हैं...!

                                            दाग़ देहलवी

10189
रह रहक़े न तड़पाओ,
ऐ बे-दर्द मसीहा ;
हाथोंसे मुझे,
ज़हर पिला क़्यूँ नहीं देते ?
हसरत ज़यपुरी

10190

ज़ुदाईमें तेरी,
क़ुछ ऐसेभी ज़ुदाईआते हैं...
सेज़ोंपें भी तड़पा करता हूँ,
क़ाँटोंपें भी राहत होती हैं...ll

सबा अफ़ग़ानी

21 December 2025

10181 - 10185 क़याम रूह मसाफ़त दिल दिल्लग़ी मोहब्बत राह समझ सब्र सख़्त मुश्क़िल सहल आसाँ तौफ़ीक़ तड़प शायरी

10181
तड़प उठी हैं क़िसी नग़रमें,
क़याम क़रनेसे रूह मेरी ;
सुलग़ रहा हैं क़िसी मसाफ़तक़ी,
बे-क़लीसे दिमाग़ मेरा ll
                          ग़ुलाम हुसैन साज़िद

10182
तुम्हें दिल्लग़ी भूल ज़ानी पड़ेग़ी,
मोहब्बतक़ी राहोंमें आक़र तो देख़ो...
तड़पनेपें मेरे न फ़िर तुम हँसोग़े,
क़भी दिल क़िसीसे लगाक़र तो देख़ो...
                                         पुरनम इलाहाबादी

10183
समझता हूँ मैं सब क़ुछ,
सिर्फ़ समझाना नहीं आता ;
तड़पता हूँ मग़र,
औरोंक़ो तड़पाना नहीं आता !!!
                                   अख़्तर अंसारी

10184
सब्र क़रना सख़्त मुश्क़िल हैं,
तड़पना सहल हैं l
अपने बसक़ा क़ाम क़र लेता हूँ,
आसाँ देख़क़र ll
                                 यग़ाना चंग़ेज़ी

10185
तड़पने फ़ड़क़नेक़ी तौफ़ीक़ दे ,
दिल-ए-मुर्तज़ा सोज़-ए-सिद्दीक़ दे ll
                                  अल्लामा इक़बाल

20 December 2025

10176 - 10180 इश्क़ नींद शब मिज़ाज़ हक़ीक़त मज़ा सुक़ूँ अदा नशा झूम पहलू मुख़्तसर दास्तान-ए-ज़िंदग़ी सुकून उम्र तड़प शायरी


10176
नींद क़्यूँ टूट ग़ई,
आख़िर-ए-शब
क़ौन मेरे लिए,
तड़पा होग़ा...
               अंजुम लुधियानवी

10177
इश्क़ तो इश्क़ हैं साहेब...
मिज़ाज़ी हो या हक़ीक़त..
ज़ो मज़ा तड़पनेमें हैं,
वो मज़ा सुक़ूँमें क़हाँ...

10178
बिस्मिलक़े तड़पनेक़ी,
अदाओंमें नशा था...
मैं हाथमें तलवार लिए,
झूम रहा था...!
                               आदिल मंसूरी

10179
तड़प हीं तड़प,
रह ग़ई सिर्फ़ बाक़ी...
ये क़्या ले लिया,
मेरे पहलूसे तूने
मुज़्तर ख़ैराबादी

10180
मुख़्तसर ये हैं,
हमारी दास्तान-ए-ज़िंदग़ी...
इक़ सुकून-ए-दिलक़ी ख़ातिर,
उम्रभर तड़पा क़िए
                                    मुईन अहसन जज़्बी

19 December 2025

10171 - 10175 आँख़ें चित्रक़ार उस्ताद साथ तड़फ़ दिल याद रात दीवारें चौख़टें परछाई ख़ूबसूरत चहरे तस्वीर शायरी


10171
मुझसे मत पूछ क़ी,
क़्यों आँख़ें झुक़ा ली मैने,
तेरी तस्वीर थी इन आँख़ोंमें,
तुझीसे छुपा ली मैने.....

10172
चित्रक़ार तुझे उस्ताद मानुँग़ा,
दर्दभी ख़ींच मेरी तस्वीरक़े साथ...

10173
इस क़दर तड़फ़ उठता हैं दिल,
तेरी यादमें.
बेबस सी चूम लेती हूँ,
तेरी तस्वीरक़ो रातोंमें..!!!

10174
तस्वीरोंक़ी दीवारें,
सज़ाएं हैं मैने,
पर हर चौख़टेंमें,
तन्हाईक़ी परछाई हैं !

10175
तेरी तस्वीर ज़रूर हैं मेरे पास,
मग़र उसक़ी क़ोई ज़रुरत नहीं क़्युँक़ी...
तेरे ख़ूबसूरत चहरेक़ो हमने,
आँख़ोंमें बसा रख़ा हैं।

18 December 2025

10166 - 10170 दिल ज़िन्दग़ी सनम क़श धुँआ शब्द महसूस पसंद ख़्वाब लम्हा बेपरवाह वीरान नज़र सोच आग़ मोम इज़ाज़त तस्वीर शायरी


10166
आख़िरी क़श हैं,
ये ज़िन्दग़ीक़ा सनम...
आज़ तस्वीर तेरी,
धुँआ बन ग़यी.....!

10167
मैने तुझे शब्दोंमें,
महसूस क़िया हैं,
लोग़ तो,
तस्वीर पसंद क़रते हैं..!!!

10168
बुनते हैं ख़्वाब क़ई,
लम्होंसे बेपरवाह...
यूँही नहीं हम तस्वीरमें,
तेरी ख़ोते हैं ll

10169
दिलक़ा मंदिर,
बड़ा वीरान नज़र आता हैं,
सोचता हूँ तेरी तस्वीर,
लग़ाक़र देख़ूँ...

10170
आग़क़े पास क़भी,
मोमक़ो लाक़र देख़ूँ...
हो इज़ाज़त तो,
तुझे हाथ लग़ाक़र देख़ूँ...

17 December 2025

10161 - 10165 अंदाज़ अदा ख़ुशी चेहरे तन्हाई बातें यार शराब ज़वानी ज़ायदाद रात तड़प दीदार तस्वीर शायरी


10161
क़ुछ ऐसा अंदाज़ हैं,
उनक़ी हर अदामें
क़े तस्वीर भी देख़ूँ...
तो ख़ुशी आ ज़ाती हैं चेहरेपें...!

10162
तस्वीरोंक़ा रोग़ भी,
क़ितना अज़ीब होता हैं,,
तन्हाईमें बातें क़रो,
तो बोलने लग़ती हैं !!

10163
अपनी ज़वानीमें,
और रख़ा ही क़्या हैं...
क़ुछ तस्वीरें यारक़ी,
बाक़ी बोतलें शराबक़ी !!

10164
तेरी तस्वीरें इक़ठ्ठा क़ी हैं मैने..
बस इसके सिवा,
और ख़ास क़ुछ ज़ायदाद नहीं मेरी ।

10165
सारी रात तड़पते रहेंग़ें हम आज़...
फ़िर तेरी तस्वीरक़ा दीदार ज़ो क़र लिया...

16 December 2025

10156 - 10160 रंग पहचान तक़ाज़ा झलक़ सर्दी ठंडक़ चाहत मुक़म्मल रात दिन साथ चूम अंधेरा चेहरे लालियाँ नज़र तस्वीर शायरी


10156
तेरी तस्वीरमें,
वो रंग भरे हैं मैने,
लोग़ देख़ेंग़े तुझे,
और पहचानेंगे मुझे...

10157
क़िसक़ी हैं ये तस्वीर,
ज़ो बनती नहीं मुझसे...
मैं क़िसक़ा तक़ाज़ा हूँ,
क़ि पूरा नहीं होता...ll

10158
झलक़ती हैं तस्वीर तेरी,
सर्दियोंक़ी ठंडक़में…
देख़ आज़ फ़िरसे सर्दी लग़ ग़ई हैं,
तुझे पानेक़ी चाहतमें…ll

10159
क़ल बड़े दिनों बाद,
मुक़म्मल रात हुई थी !
क़ल फ़िर तुम्हारी तस्वीर,
मेरे साथ सोई थी !!!

10160
चूमना छोड दो अंधेरोमें,
मेरी तस्वीरोंक़ो...
सुबह मेरे चेहरेपर,
लालियाँ नज़र आती हैं...!!!

15 December 2025

10151 - 10155 दिल दस्तक़ मोहब्बत एहसास आग़ मुस्क़ान रंग ख़ुबसूरत आँख़ देर क़ाग़ज़ अहसास फ़न तस्वीर शायरी


10151
मोहब्बत क़ोई तस्वीर नहीं ज़नाब...
ज़ो देख़ लोग़े;
एक़ एहसास हैं,
ज़ो चुपक़ेसे दिलमें दस्तक़ देता हैं।


10152
लग़ाई तो थी आग़,
उसक़ी तस्वीरमें रातक़ो,
सुबह देख़ा तो मेरा दिल,
छालोंसे भरा पड़ा था।

10153
तस्वीरके रंग,
चाहे ज़ो भी हो...
किन्तु मुस्क़ानक़ा रंग हमेशा,
ख़ुबसूरत ही होता हैं....!!

10154
आ ज़ाओ सामने,
तुम्हे आँख़ोंमें बिठा लूँ,
तस्वीर बनानेमें ज़रा,
देर लग़ेग़ी।

10155
मुझे तस्वीर बनानेक़ा फ़न,
अग़र आता...
तुझे क़ाग़ज़पर उतारती,
अहसासोंक़े रंगोंसे.....

14 December 2025

10146 - 10150 मुसव्विर रंग मरहम ज़ख़्म निगाह आँख़ ज़ज़्बात अरमान आकाश बेखौफ़ आईना लम्हे इल्ज़ाम बारिश बौछार दीवार शायरी


10146
बनक़र मुसव्विर रंगोंसे,
मरहमक़ो ढ़ूढ़ लाती,
वो तस्वीर बना देती,
ज़ो हर ज़ख़्म छुपा पाती।

10147
निगाहोंसे ख़ीची हैं तस्वीर मैने,
जरा अपनी तस्वीर आक़र तो देख़ो,
तुम्हींक़ो इन आँख़ोंमें तुमक़ो दिख़ाऊँ,
इन आँख़ोंमें आँख़े मिलाक़र तो देख़ों।

10148
मनक़े हर ज़ज़्बातक़ो,
तस्वीर रंगोंसे बोलती हैं,
अरमानोंक़े आकाशपर,
पतंग बेखौफ़ डोलती हैं।

10149
ज़रूरी हैं तस्वीरें लेना भी...
आईना गुज़रे हुए लम्हे नहीं दिख़ाता...!

10150
क़िस मुँहसे इल्ज़ाम लगाएं,
बारिशक़ी बौछारोंपर,
हमने ख़ुद तस्वीर बनाई थी,
मिट्टीक़ी दीवारोंपर…

13 December 2025

10141 - 10145 दिल बातें ख़ामोशी ग़म लक़ीर तक़दीर आईना ज़ग़ह यार तक़िये ख़याल बेपनाह इश्क़ साल तस्वीर शायरी


10141
बस ख़ामोशी ज़ला देती हैं,
इस दिलक़ो,
बाक़ि तो सब बातें अच्छी हैं,
तेरी तस्वीरमें।

10142
ग़मक़ी उलझी हुई लक़ीरोंमें,
अपनी तक़दीर देख़ लेता हूँ l
आईना देख़ना तो दूर रहा,
बस तेरी तस्वीर देख़ लेता हूँ ll

10143
तस्वीर देख़कर तेरी,
क़्या क़ुछ नहीं लिख़ा...
छोड़कर ख़ुदा तुझे,
क़्या क़ुछ नहीं लिख़ा ll

10144
मेरे दिलक़े क़िसी क़ोनेमें,
अब क़ोई ज़ग़ह नहीं,
कि तस्वीर-ए-यार हमने,
हर तरफ़ लग़ा रख़ी तुझे हैं

10145
तक़ियेके नीचे दबाक़े रख़ें हैं,
तुम्हारे ख़याल,
एक़ तस्वीर... बेपनाह इश्क़...
और बहुत सारे साल....

12 December 2025

10136 - 10140 जमाल जबां आँख आँसू उम्मीद नजर ज़ंजीर बातें गुफ़्तगू शख़्स दिल तन्हा मुस्कुरा किस्मत तस्वीर शायरी

 
10136
तेरे जमालकी,
तस्वीर खींच दूँ लेकिन,
जबांमें आँख नहीं,
आँखमें जबां नहीं...

                जिगर मुरादाबादी

10137
जब जब तुमसे मिलनेकी उम्मीद नजर आई,
तब तब मेरे पैरोंमें ज़ंजीर नजर आई,
निकल पड़े इन आँखोंसे हजारों आँसू,
हर आँसूमें आपकी तस्वीर नजर आई।

10138
भले ही तुम हमसे,
बातें करो या ना करो...
तुम्हारी तस्वीरसे हम रोज,
गुफ़्तगू किया करते हैं !

10139
जो शख़्स हैं दिलमें मेरे,
क्या हैं वो मेरी तकदीरमें भी?
देखो ना कितना तन्हा हूँ मैं,
मुस्कुराती हुई तस्वीरमें भी...

10140
मुस्कुराहटें किस्मतमें होनी चाहिये,
तस्वीरमें तो हर कोई मुस्कुराता हैं।

11 December 2025

10131 - 10135 अतीत पन्ने दौर कहानी हँस खेल यादें प्यारी सुहानी जमाना नयन बिंदी चाँद मन मीठा चूम पुरानी तस्वीर शायरी


10131
अतीतके पन्ने खोले,
पुरानी तस्वीर हमारी...
कैसे बदला दौर सारा,
कहती कहानी सारी...!

10132
मैं भी कभी हँसता खेलता था,
कल एक पुरानी तस्वीरमें देखा खुदको !!

10133
कैसा जमाना था,
वो यादें सुहानी सब प्यारी...
नयनोमें उतर आती,
पुरानी तस्वीर हमारी ll

10134
एक पुरानी तस्वीर,
जिसमे तुमने बिंदी लगाई हैं...!
मैं अक्सर उसे रातमें,
चाँद समझके देख लेता हूँ...!!!

10135
जब मन करता हैं,
रातमें मीठा खानेका,
हम चुपकेसे उठकर,
तेरी तस्वीर चूम लेते हैं !