11126
धड़क़ने टूटक़र,
बिख़रने लग़ती हैं;
ज़ब याँद तुम बे-हिसाब,
आने लग़ते हो…!
11128
और थोड़ासा बिख़र ज़ाऊँ,
यहीं ठानी हैं…
ज़िंदगी मैने अभी,
हार कहाँ मानी हैं…?
11130
बिख़रनेक़े बहाने तो,
बहुत मिल ज़ायेग़े,
आओ हम ज़ुड़नेक़े...?
अवसर खोजें।
Enjoy 10500 + Fragrances of Shayari. Feel the Emotions, Expressions, Love, Ethics and beautiful colours of Life. ANDAAZ-A-SHAYARI is a Heartfelt collection touching every Soul... Baten, Khamosh, Vasta, Manzil Maikhana Rahen, Furkat, Bevafah, Khyal, Dard, Judai Shayari
11126
धड़क़ने टूटक़र,
बिख़रने लग़ती हैं;
ज़ब याँद तुम बे-हिसाब,
आने लग़ते हो…!
11128
और थोड़ासा बिख़र ज़ाऊँ,
यहीं ठानी हैं…
ज़िंदगी मैने अभी,
हार कहाँ मानी हैं…?
11036
सुना इक़बाल-ए-इस्याँ,,
ख़ल्वतोंमें वज्ह-ए-बख़्शिश हैं…l
क़लीसाओंमें,
ये तर्ज़-ए-इबादत आम हैं, साक़ी ll
मानी नाग़पुरी
11038
नमाज़ इक़ भी हरगिज़ न उस ने क़ज़ा क़ी
शब ओ रोज़ क़रता इबादत ख़ुदाक़ी
राज़ा मेहदी अली ख़ाँ
11040
फ़क़ीरोंक़ो इरफ़ान-ए-हस्ती न मिलता,
अता ज़ाहिदोंक़ो इबादत न होती ll
साग़र सिक़ी