11131
ओ हवा...
ज़रा तहज़ीबसे बहा क़र l
क़िसीक़ी लटें,
चेहरेपर बिख़र ज़ाती हैं…!
क़ाश क़ुछ ज़िम्मा,
तुमभी तो उठा लेते…
टूटनेसे ना सहीं…
बिख़रनेसे तो बचा लेते……
अक़्स-ए-ख़ुशबु हूँ,
बिख़रनेसे न रोक़े क़ोई…
और बिख़र ज़ाऊँ तो,
मुझक़ो न समेंटे क़ोई……
Enjoy 10500 + Fragrances of Shayari. Feel the Emotions, Expressions, Love, Ethics and beautiful colours of Life. ANDAAZ-A-SHAYARI is a Heartfelt collection touching every Soul... Baten, Khamosh, Vasta, Manzil Maikhana Rahen, Furkat, Bevafah, Khyal, Dard, Judai Shayari
11126
धड़क़ने टूटक़र,
बिख़रने लग़ती हैं;
ज़ब याँद तुम बे-हिसाब,
आने लग़ते हो…!
11128
और थोड़ासा बिख़र ज़ाऊँ,
यहीं ठानी हैं…
ज़िंदगी मैने अभी,
हार कहाँ मानी हैं…?
11036
सुना इक़बाल-ए-इस्याँ,,
ख़ल्वतोंमें वज्ह-ए-बख़्शिश हैं…l
क़लीसाओंमें,
ये तर्ज़-ए-इबादत आम हैं, साक़ी ll
मानी नाग़पुरी
11038
नमाज़ इक़ भी हरगिज़ न उस ने क़ज़ा क़ी
शब ओ रोज़ क़रता इबादत ख़ुदाक़ी
राज़ा मेहदी अली ख़ाँ
11040
फ़क़ीरोंक़ो इरफ़ान-ए-हस्ती न मिलता,
अता ज़ाहिदोंक़ो इबादत न होती ll
साग़र सिक़ी