6136
मुस्कुराहटमें छिपाते हैं,
जो अपने गमोंको...
वो अपनी हालतपें,
औरोंको रूला देते हैं...
6137
इज़हार-ए-याद
करूँ या,
पुछू-हाल-ए
दिल उनका...
ए दिल कुछ
तो बहाना बता,
उनसे बात करनेका.......!
6138
काश लत ना तेरी लगाते.
शायद ये हालत ना होती...
काश के तुम ना मिलते,
हमें मोहब्बत ना होती...
6139
बहुत अलगसा हैं,
मेरे दिलका हाल...
एक तेरी खामोशी,
और मेरे लाखों
सवाल...!
6140
मैं बदलते हुए हालातमें,
ढल जाता हूँ.......
और देखने वाले मुझे,
अदाकार समझते हैं.......!
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