4 January 2026

10246 - 10250 मोहब्बत नफ़रत क़रवट ख़्वाब सवेरा रात क़यामत अश्क़ क़नार क़ब्र तड़प शायरी

 
10146
मुझे नफ़रत हैं,
इस मोहब्बतक़े नामसे l
क़्यूँ बिना क़सूर,
तड़पा तड़पाक़र मारा हैं मुझे ll

10247
बदले न क़रवटें भी,
क़ोई फ़र्श-ए-ख़्वाबपर...
ग़मसे तड़प तड़पक़े,
सवेरा क़रे क़ोई......?
शोला क़रारवी

10248
क़िस शब तड़प तड़पक़े,
न क़ाटी तमाम शब ;
क़िस रोज़ मेरे घरपें,
क़यामत नहीं रहीं !
                       नादिर शाहज़हाँ पुरी

10249
पिरोए अश्क़ोंक़े,
रोरोक़े हार ग़ोरीने l
तड़प-तड़पक़े ग़ुज़ारी,
बहार ग़ोरीने ll
तुफ़ैल होशियारपुरी

10250
क़नार-ए-ग़ैरमें,
रातें तड़प तड़पक़े क़टीं ;
रहे न चैनसे वो,
क़ब्रमें सुलाक़े मुझे...!
                                   रियाज़ ख़ैराबादी

3 January 2026

10241 - 10245 पहलू क़ुंज़-ए-क़फ़स बाल-ओ-पर ख़ामोश दिल सुक़ून इज़्तिराब बेरुख़ी याद नाम ढूँढ शब-ए-इंतिज़ार शायरी

 
10241
तड़प हीं तड़प रह ग़ई,
सिर्फ़ बाक़ी...
ये क़्या ले लिया,
मेरे पहलूसे तूने...?
                               मुज़्तर ख़ैराबादी

10242
क़ुंज़-ए-क़फ़स दिया हैं,
तो इतनी सक़त भी दे ;
तोड़ें तड़प तड़पक़े,
हर इक़ बाल-ओ-परक़ो हम !
नज़ीर हुसैन सिद्दीक़ी

10243
आख़िर तड़प तड़पक़े,
ये ख़ामोश हो ग़या...
दिलक़ो सुक़ून मिल ही गया,
इज़्तिराबमें l
                                    साहिर होशियारपुरी

10244
फ़िर उसे अपनी,
हर बेरुख़ी याद आए...
तड़प तड़पक़े वो,
नाम मेरा दोहराए...
मुअज़्ज़मा नक़वी

10245
मैं ढूँढता हूँ क़िसे,
बार-बार क़्या क़हिए ?
तड़प तड़पक़े शब-ए-इंतिज़ार,
क़्या क़हिए......!
                                    क़ाज़ी ज़लाल हरीपुरी

2 January 2026

10236 - 10240 ख़िलौने सड़क़ ज़बीन-ए-नियाज़ ज़ुल्फ़ दिल फ़रियाद आँख़ ड़र आँसू उल्फ़त क़सम ज़ालिम तड़प शायरी


10236
ख़िलौनेक़ी तड़पमें,
ख़ुद ख़िलौना वो बन ज़ाए ;
मिरा बच्चा सड़क़पर,
रोज़ग़ारी लेक़े निक़ला हैं ll

                                             रऊफ़ ख़ैर


10237
सज़्दे तड़प रहें हैं,
ज़बीन-ए-नियाज़में,
सर हैं क़िसीक़ी ज़ुल्फ़क़ा,
सौदा लिए हुए......
अदा ज़ाफ़री


10238
दिल तड़पता हैं फ़रियाद क़रक़े,
आँख़ ड़रती हैं आँसू बहाक़े...
ऐसी उल्फ़तसे वो ज़ाते ज़ाते,
मुझक़ो अपनी क़सम दे ग़ए हैं ll


10239
ज़लती हुई ज़मींपें,
तड़पने लग़े इमाम...
बेक़सपें ज़ालिमोंने,
क़िया और इज़्दिहाम...
मीर अनीस


10240
मज़ा हैं तिरे बिस्मिलोंक़ो तड़पमें,
तड़पमें नहीं बिस्मिलोंमें मज़ा हैं ll

                                                   क़ैफ़ी हैंदराबादी

1 January 2026

10231 - 10235 दिल समझ बेसबब इश्क़ लत नावक़-ए-ज़फ़ा निग़ाह शोर ख़बर दाएरे क़र्ब तड़प शायरी


10231
बेसबब 'राग़िब',
तड़प उठता हैं दिल...
दिलक़ो समझाना पड़ेग़ा,
ठीक़से......
                           इफ़्तिख़ार राग़िब

10232
ये इश्क़ भी एक़ लत हैं,
बहुत तड़पाता हैं....
दिलभी नहीं लग़ता,
ज़ब दिल क़हीं लग़ ज़ाता हैं...
कुँवर मुजतबा

10233
तड़प रहा हैं दिल,
इक़ नावक़-ए-ज़फ़ाक़े लिए ;
उसी निग़ाहसे फिर,
देखिए ख़ुदाक़े लिए ll
                               लाला माधव राम जौहर

10234
इस शोरने तड़पा दिया,
हज़रतक़े ज़िग़रक़ो l
अक़बरसे क़हा ज़ाओ तो,
अम्मोक़ी ख़बरक़ो ll
मिर्ज़ा सलामत अली दबीर

10235
दिलक़ी मौजोंक़ी तड़प,
मेरी सदामें आए...
दाएरे क़र्बक़े फैले तो,
हवामें आए ll
                                 आसिफ़ साक़िब