13 March 2026

10561- 10565 दिल एतिराफ़ निशान वफ़ा हाल सवाल ज़वाब सहल पराया सनम सिलसिले रुत दुख़ ज़ख़्म शायरी

 
10561
या ज़ख़्म-ए-दिलक़ो,
छीलक़े सीनेसे फ़ेंक़ दे…
या एतिराफ़ क़र क़ि,
निशान-ए-वफ़ा मिला…
                            सीमाब अक़बराबादी

10562
ज़ख़्म देक़र भी पूछती हैं…
हाल मेरा;
ज़वाब तो नहीं पास…
पर लाज़वाब हैं, ये सवाल तेरा।

10563
ज़ख़्म दिलक़े,
अग़र सिए होते…
अहल-ए-दिल,
क़िस तरह ज़िए होते……
                                  अब्दुल हमीद अदम

10564
ज़ख़्म तो क़र दिए,
अब भला सहलानेसे क़्या होग़ा,
पराया तो क़र चुक़े हो,
सनम, अब भला अपनानेसे क़्या होग़ा…

10565
नई रुतोंमें दुख़ोंक़ेभी,
सिलसिले हैं नए…
वो ज़ख़्म ताज़ा हुए हैं,
ज़ो भरनेवाले थे……
                           ज़माल एहसानी

12 March 2026

10556 - 10560 दिल मज़रूह हवा नज़र निशाँ बेहतर ग़ज़ल नमक़ क़ीमत सस्ती ग़हरा मिज़ाज़ ज़ख़्म शायरी

 
10556
क़िस नज़रसे आपने देख़ा,
दिल-ए-मज़रूहक़ो l
ज़ख़्म ज़ो क़ुछ भर चले थे,
फ़िर हवा देने लग़े ll
                                   साक़िब लख़नवी

10557
क़ुछ ज़ख़्म,
अंदरतक़ तोड़ ज़ाते हैं…
भर तो ज़ाते हैं पर…
निशाँ छोड़ ज़ाते हैं…!

10558
फ़ुलाँसे थी ग़ज़ल,
बेहतर फ़ुलाँक़ी…
फ़ुलाँक़े ज़ख़्म अच्छे थे,
फ़ुलाँसे……
                                  ज़ौन एलिया

10559
नमक़क़ी क़ीमत,
सस्ती हैं बहुत;
लोग़ ख़ाते क़ाम,
छिड़क़ते ज़्यादा हैं।

10560
इक़ ज़ख़्म मुझक़ो चाहिए,
मेरे मिज़ाज़क़ा…
यानी हरा भी चाहिए,
ग़हरा भी चाहिए…
                                           ज़व्वाद शैख़

11 March 2026

10551 - 10555 दिल रफ़ू शीशे हाथ बदलियाँ बरख़ा रुतें पुरवाईयाँ बेच शेर इश्क़ रोज़ग़ार अच्छा ज़ख़्म शायरी


10551
'मुसहफ़ी' हम तो ये समझे थे क़ि,
होग़ा क़ोई ज़ख़्म…
तेरे दिलमें तो बहुत क़ाम,
रफ़ूक़ा निक़ला……!
                                        मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

10552
क़ाश बनानेवालेने,
दिल शीशेक़े बनाये होते,
तोड़नेवालेक़े हाथमें,
ज़ख़्म तो आये होते।

10553
ज़ख़्म दिलक़े फ़िर,
हरे क़रने लगीं…
बदलियाँ, बरख़ा,
रुतें, पुरवाईयाँ !!!
                         क़ैफ़ भोपाली

10554
क़हीं क़ोई ज़ख़्म बेच दिया,
क़हीं क़ोई शेर सुना दिया…
ज़ो क़भी इश्क़ था,
उसे हमने रोज़ग़ार बना दिया…!

10555
तुझक़ो अपनाक़े भी,
अपना नहीं होने देना…
ज़ख़्म-ए-दिलक़ो क़भी,
अच्छा नहीं होने देना……
                                     आमिर अमीर

10 March 2026

10546 - 10550 जंग़ ग़ुलदान बारात हज़ार ग़म बिसर चमन शय महफ़िल अक़ेले शरीर दिल ज़ख़्म शायरी


10546
भर ज़ाएँग़े ज़ब ज़ख़्म तो,
आऊँग़ा दोबारा…
मैं हार ग़या जंग़,
मग़र दिल नहीं हारा ll
                                    सरवत हुसैन

10547
देख़ पा रहीं हो ज़ो,
लाल दिलपर ज़ख़्म हरे हैं l
क़िसी औरक़े नहीं,
ये तुम्हारे ही क़रे हैं ll

10548
दिलमें वो ज़ख़्म ख़िले हैं,
क़ि चमन क़्या शय हैं…
घरमें बारातसी उतरी हुई,
ग़ुलदानोंक़ी…!
                            अहमद नदीम क़ासमी

10549 
क़ुछ शरीरपर लग़ें हैं,
क़ुछ दिलपर लग़ें हैं;
ज़ख़्म क़ुछ अक़ेलेमें लग़ें हैं,
तो क़ुछ भरी महफ़िलमें लग़ें हैं ll

10550
बस एक़ ज़ख़्म था,
दिलमें ज़ग़ह बनाता हुआ…
हज़ार ग़म थे मग़र,
भूलते-बिसरते हुए……
                                  राज़ेन्द्र मनचंदा बानी

9 March 2026

10541 - 10545 वफ़ा ज़ीना धोख़ा स्वाद सँवर मरहम मिसाल ग़ुलाब ग़ैर क़ोशिश दाग़ चोट ज़ख़्म शायरी


10541
चारासाज़ोंसे अलग़ हैं,
मिरा मेआ'र क़ि मैं…
ज़ख़्म ख़ाऊँग़ा तो,
क़ुछ और सँवर ज़ाऊँग़ा…!
                                    अहमद नदीम क़ासमी

10542
वफ़ाओंक़ो धोख़ोंक़ा स्वाद,
बेधड़क़ मिल रहा हैं,
ज़ख़्मोंक़ो मरहम नहीं,
नमक़ मिल रहा हैं।

10543
क़हाँ मिलेग़ी मिसाल,
मेरी सितमग़रीक़ी,,,
क़ि मैं ग़ुलाबोंक़े ज़ख़्म,
क़ाँटोंसे सी रहा हूँ…!
                                मोहसिन नक़वी

10544
ग़ैरोंने क़ोशिश क़ी होग़ी,
चोट पहुंचाने क़ी,
पर ज़ख़्म तो हमें,
अपनोंने ही दिए हैं।

10545
ज़ो ज़ख़्म क़ि सुर्ख़ ग़ुलाब हुए,
ज़ो दाग़ क़ि बदर-ए-मुनीर हुए…
इस तरहासे क़ब तक़ ज़ीना हैं,
मैं हार ग़या इस ज़ीनेसे……
                                              साक़ी फ़ारुक़ी

8 March 2026

10536 - 10540 दिल ज़ुर्म ज़िंदग़ी मोहोब्बत नज़्म ख़ामोश दर्द लहू रवा शराब सहारा मोहर सुकूत ज़ख़्म शायरी


10536 
क़ोई ख़ामोश ज़ख़्म लग़ती हैं,
ज़िंदग़ी एक़ नज़्म लग़ती हैं ll
                                                 ग़ुलज़ार

10537
रोते नहीं मग़र, दर्द क़म नहीं हैं,
दर्द इतना बयाँ क़र दे,
ऐसी अब तक़ क़ोई,
नज़म नहीं हैं ।

10538
ज़ख़्म ग़र दब ग़या,
लहू न थमा…
क़ाम ग़र रुक़ ग़या,
रवा न हुआ ll
                            मिर्ज़ा ग़ालिब

10539
ना ज़ख़्म भरे,
ना शराब सहारा हुई l
ना वो लौटे,
ना मोहोब्बत दोबारा हुई ll

10540
ज़ख़्म-ए-दिल ज़ुर्म नहीं,
तोड़ भी दे मोहर-ए-सुकूत…
जो तुझे ज़ानते हैं,
उनसे छुपाता क़्या हैं…?
                                          हज़ाद अहमद

7 March 2026

10531 - 10535 दिल मोहब्बत शख़्स दर्द ख़ुश रग़ बेवज़ह ज़ख़्म शायरी


10531 
मोहब्बतोंने क़िसीक़ी,
भुला रख़ा था उसे…
मिले वो ज़ख़्म क़ि फ़िर…
याद आ ग़या इक़ शख़्स……
                                         उबैदुल्लाह अलीम

10532
वो हमें दर्दमें देख़क़रभी ख़ुश थे,
हम ख़ुश थे, क़्यूँक़ि वो ख़ुश थे।

10533
हम तो समझे थे क़ि,
इक़ ज़ख़्म हैं, भर ज़ाएग़ा…
क़्या ख़बर थी क़ि,
रग़-ए-जाँमें उतर ज़ाएग़ा......
                                       परवीन शाक़िर

10534
क़िसी एक़ ज़ग़ह नहीं,
ज़ग़ह-ज़ग़ह लग़े हैं,
ज़ख़्म दिलपर मेरे,
बेवज़ह लग़े हैं।

10535
मैने चाहा था ज़ख़्म भर ज़ाएँ…
ज़ख़्मही ज़ख़्म भर ग़ए मुझमें......
                                                  अम्मार इक़बाल

6 March 2026

10526 - 10530 दिल मोहब्बत याद खंज़र बदनाम लफ़्ज़ मुलाक़ात नज़र मुस्क़ुराहट ग़ुलज़ार ज़ख़्म शायरी


10526
ज़ख़्म-ए-दिल बोले,
मिरे दिलक़े नमक़-ख़्वारोंसे…
लो भला क़ुछ तो मोहब्बतक़ा,
मज़ा याद रहें……
                                             शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

10527
खंज़र तो यूँ ही बदनाम हैं साहब…
असली ज़ख़्म तो,
ये क़म्बख़्त लफ़्ज़ क़र ज़ाते हैं।

10528
ज़ख़्म भरने लग़े हैं,
पिछली मुलाक़ातोंक़े…
फ़िर मुलाक़ातक़े,
आसार नज़र आते हैं ll
                           ज़ुबैर अली ताबिश

10529
ज़ख़्मोंक़ो मुस्क़ुराहटक़े,
क़म्बलसे ढक़क़र,
दौड़ तो नहीं पाता पर…
आग़े बढ़ता हूँ सरक़ क़र।

10530
ये ज़ख़्म ग़ुलज़ार बन ग़ए हैं,
ये आह-ए-सोज़ाँ घटा बनी हैं…ll
                                                 अहमद फ़राज़

5 March 2026

10521 - 10525 दिल क़रीब चीख़ याद बात ख़लिश निशानी ज़ुदाई तवील विसाल ग़हरी बाते सोच ज़ख़्म शायरी


10521
इक़ ऐसा ज़ख़्म-नुमा दिल,
क़रीबसे ग़ुज़रा;
दिल उसक़ो देख़क़े चीख़ा,
ठहर लग़ेग़ा नहीं ll
                                        उमैर नज़मी

10522
अपनी शायरी पढ़,
अक़्सर सोचता हूँ मैं…
ये बाते ज़्यादा ग़हरी,
या फ़िर ये ज़ख़्म……

10523
दे निशानी क़ोई ऐसी क़ि,
सदा याद रहें;
ज़ख़्मक़ी बात हैं क़्या…
ज़ख़्म तो भर ज़ाएँग़े……!
                                         बशर नवाज़

10524
तुझे क़्या ख़बर मह-ओ-सालने,
हमें क़ैसे ज़ख़्म दिए यहाँ…
तिरी यादग़ार थी इक़ ख़लिश,
तिरी यादग़ार भी अब नहीं…

10525
वक़्त तिरी ज़ुदाईक़ा,
इतना तवील हो ग़या…
दिलमें तिरे विसालक़े,
ज़ितने थे ज़ख़्म, भर ग़ए…
                                   अदीम हाशमी

4 March 2026

10516 - 10520 दिल ज़ख़्म दाग़ याद इंतिक़ाम हौसला साथ हँस चाहत ग़हरे ज़ख़्म शायरी

 
10516
ज़ख़्म झेले,
दाग़ भी ख़ाए बहुत...
दिल लग़ाक़र हम तो,
पछताए बहुत......
                                मीर तक़ी मीर

10517
शुक़्रिया तुम्हारी यादक़ा,
मुझे फ़िर छेड़नेक़े लिए…
मेरे ज़ख़्मोंक़ो फ़िरसे,
क़ुरेदनेक़े लिए।

10518
मैं ज़ख़्म ख़ाक़े ग़िरा था,
क़ि थाम उसने लिया…
मुआफ़ क़रक़े मुझे,
इंतिक़ाम उसने लिया ll
                                 फ़ैसल अज़मी

10519
ज़ख़्मोंक़े बावज़ूद,
मेरा हौसला तो देख !
तू हँसी तो मैं भी,
तेरे साथ हँस दिया ll

10520
ये और बात…
क़ि चाहतक़े ज़ख़्म ग़हरे हैं l
तुझे भुलानेक़ी क़ोशिश,
तो वर्ना क़ी हैं बहुत......
                                          महमूद शाम

3 March 2026

10511 - 10515 याद दिल मिट्टी फूल मरहम याद महसूस वहशत ज़ख़्म शायरी

 
10511 
याद क़रवाऊँग़ा तुझक़ो तेरे ज़ख़्म,
तेरी सारी नेमतें ग़िनवाऊँग़ा...

                                         अली ज़रयून

10512 
उसक़ी याद आई तो,
क़ुछ ज़ख़्म पुराने निक़ले; 
दिलक़ी मिट्टीक़ो क़ुरेदा तो,
ख़ज़ाने निक़ले ll
 
10513
फ़ूलतो सारे झड़ ग़ए लेक़िन,
तेरी यादक़ा ज़ख़्म हरा हैं ll

                              नासिर क़ाज़मी

10514
मरहम ना सही,
एक़ ज़ख़्मही दे दो l
महसूस तो हो,
तुम्हे याद हैं हम ll
 
10115
अब तिरी यादसे,
वहशत नहीं होती मुझक़ो l
ज़ख़्म ख़ुलते हैं,
अज़िय्यत नहीं होती मुझक़ो ll

                                    शाहिद ज़क़ी

1 March 2026

10506 - 10510 दुनियाँ यादबात आँख़ चाँद शब मौसम सफ़र क़ाफ़िला रूह तन्हाई शायरी


10506
आँख़ोंक़ो आँख़ोंसे बताई ज़ाती हैं,
दुनियाँसे जो बात छुपाई ज़ाती हैं l
चाँदसे पुछो या पूछो मेरे दिलसे,
तन्हा क़ैसे रात बिताई ज़ाती हैं ll

10507
तन्हाईयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं…
शब-भर तुम्हारी यादने सोने नहीं दिया ll
नासिर क़ाज़मी

10508
एक़ पुराना मौसम लौटा,
याद भरी तन्हाई भी…
ऐसा तो क़म हीं होता हैं,
तू भी हैं तन्हाई भी…...ll

10509
ज़िंदगी यूँ हुईमौसम ,
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा..!
ग़ुलज़ार

10510
जो रूहक़ी तन्हाई होती हैं न,
उसक़ो क़ोई ख़त्म नहीं क़र सक़ता !

28 February 2026

10501 - 10505 इश्क़ दिल इलज़ाम रुसवाई छीन भीड़ शामिल ज़ेहन मौसम उदास मुलाक़ात‬ तन्हाई शायरी

10501
लोग़ोंने छीन ली हैं,
मेरी तन्हाई तक़…
इश्क़ आ पहुँचा हैं,
इलज़ामसे रुसवाई तक़……

10502
शहरक़ी भीड़में शामिल हैं,
अक़ेला-पन भी…
आज़ हर ज़ेहन हैं,
तन्हाईक़ा मारा देख़ो……
हसन नज़्मी सिक़न्दरपुरी

10503 
तन्हा मौसम हैं,
और उदास ‪‎रात‬ हैं,
वो मिलक़े बिछड़ ग़ये,
ये ‪‎क़ैसी मुलाक़ात‬ हैं?
दिल धड़क़ तो रहा हैं,
मग़र ‎आवाज़‬ नहीं हैं,
वो धड़क़न भी साथ ले ग़ये,
‎क़ितनी अज़ीब‬ बात हैं!‬‬‬‬

10504
यादोंक़ी महफ़िलमें ख़ोक़र,
दिल अपना तन्हा तन्हा हैं ll
आज़ाद ग़ुलाटी

10505
क़हीं पर शाम ढलती हैं,
क़हीं पर रात होती हैं;
अक़ेले ग़ुमसुम रहते हैं,
न 
‎क़िसीसे बात होती हैं l
तुमसे मिलनेक़ी आरज़ू,
दिल बहलने नहीं देती,
तन्हाईमें आँख़ोंसे रुक़-रुक़क़े,
बरसात होती हैं ll

27 February 2026

11496 - 10500 सनम दिल सनम हालत ख़राबी ग़म वफ़ा रातों तन्हाई ज़िक़्र दस्तक़ हसरत बेख़ुद शायरी


10496
क़िसी हालतमें भी,
तन्हा नहीं होने देती…
हैं यहीं एक़ ख़राबी,
मेरी तन्हाईक़ी......

                            फ़रहत एहसास

10497
ऐ सनम, तू साथ हैं मेरे,
मेरी हर तन्हाईमें…
क़ोई ग़म नहीं,
क़ी तुमने वफ़ा नहीं क़ी l
इतना हीं बहुत हैं,
क़ी तू शामिल हैं मेरी…
तबाहींमें।

10498
कुछ तो तन्हाईक़ी रातोंमें,
सहारा होता;
तुम न होते, न सहीं ज़िक़्र,
तुम्हारा होता……

                                       अख़्तर शीरानी

10499
अपनी तन्हाईमें ख़लल,
यूँ डालूँ सारी रात…
खुद हीं दरपें दस्तक़ दूँ,
और खुदहीं पूछूं कौन…?

10500
उनक़ी हसरत भी नहीं,
मैं भी नहीं, दिल भी नहीं...
अब तो 'बेख़ुद' हैं,
ये आलम मेरी तन्हाई क़ा...
                                               बेखुद बदायुनी

26 February 2026

10491 - 10495 दिल थक़न टूटन उदासी तन्हाई अधूरा क़ारवाँ याद क़दर उम्मीद बादल महबूब ज़ख्म तन्हाई शायरी


10491
थक़न, टूटन, उदासी,
ऊब, तन्हाई, अधूरापन…
तुम्हारी यादक़े संग़,
इतना लम्बा क़ारवाँ क़्यूँ हैं…… ? 

10492
अपने साएसे चौंक़ ज़ाते हैं,
उम्र ग़ुज़री हैं इस क़दर तन्हा…
ग़ुलज़ार

10493
ए मेरे दिल,
क़भी तीसरेक़ी,
उम्मीदभी ना क़िया क़र…
सिर्फ तुम और मैं ही हैं,
इस दश्त-ए-तन्हाईमें...!!!

10494
इतने घने बादलक़े पीछे,
क़ितना तन्हा होगा चाँद……?
परवीन शाक़िर

10495
मैं अपनी तन्हाईक़ो
सरेआम लिख़ना चाहती हूँ;
मेरे महबूब तेरे दिये ज़ख्मक़ो,
लिख़ना चाहती हूँ…...!

25 February 2026

10486 - 10490 आदत बात आग़ ज़ल आशियाने बसर सफ़र क़ाफ़िला साथ याद तन्हाई शायरी


10486
मुझे तन्हाईक़ी आदत हैं,
मेरी बात छोड़ो…
तुम बताओ, क़ैसी हो……?

10487
तन्हाईक़ी आग़में क़हीं,
ज़लही न ज़ाऊँ ?
क़े अब तो क़ोई मेरे,
आशियानेक़ो बचा ले……

10488
ज़िंदग़ी यूँ हुई बसर,
तन्हा क़ाफ़िला साथ,
और सफ़र तन्हा……

10489
मैं तन्हाईक़ो तन्हाईमें,
तनहा क़ैसे छोड़ दूँ…?
इस तन्हाईने तन्हाईमें,
तनहा मेरा साथ दिया हैं……

10490
अब तो यादभी,
उसक़ी आती नहीं…
क़ितनी तनहा हो ग़ई,
तन्हाइयाँ हैं……

24 February 2026

10481 - 10485 मोहब्बत दिल ग़म दर्द लम्हा मंज़र अफ़सोस अंग़ार सुलग़ याद लब हँसी दुनियाँ प्यार इंतज़ार सच्चा तन्हाई शायरी


10481
तन्हाईक़ा उसने मंज़र नहीं देख़ा,
अफ़सोसक़ी मेरे दिलक़े अंदर नहीं देख़ा l
दिल टूटनेक़ा दर्द वो क़्या ज़ाने…
वो लम्हा उसने क़भी ज़ीक़र नहीं देख़ा…ll

10482
क़ाँटोंसी दिलमें चुभती हैं तन्हाई,
अंग़ारोंसी सुलग़ती हैं तन्हाई,
क़ोई आक़र हमक़ो ज़रा हँसा दे,
मैं रोता हूँ तो रोने लग़ती हैं तन्हाई ll

10483
यादोंमें आपक़े तनहा बैठे हैं,
आपक़े बिना लबोंक़ी हँसी ग़ँवा बैठे हैं l
आपक़ी दुनियाँमें अँधेरा न हो इसलिए,
ख़ुदक़ा दिल ज़ला बैठे हैं……!!

10484
क़िसीक़ो प्यारक़ी सच्चाई मार डालेग़ी,
क़िसीक़ो दर्दक़ी ग़हराई मार डालेग़ी;
मोहब्बतमें बिछड़क़े क़ोई ज़ी नहीं सक़ता,
और बच ग़या तो उसे तन्हाई मार डालेग़ी ll

10485
तेरे बिना ये क़ैसे गुज़रेंग़ी मेरी रातें…
तन्हाईक़ा ग़म क़ैसे सहेंग़ी ये रातें…
बहुत लंबी हैं ये घड़ियाँ इंतज़ारक़ी,
क़रवट बदल-बदलक़े क़टेंग़ी ये रातें…!

23 February 2026

10476 - 10480 याद अर्थी क़फ़न ग़म तक़िया इंतज़ाम इश्क़ मोहब्बत तलाश बिखर एहसान तन्हाई शायरी


10476
यादोंक़ी अर्थी तन्हाईक़ा क़फ़न,
ग़मक़ा तक़िया ;
इंतज़ाम तो सब हो ग़या बस…
नींदक़ा आना बाक़ी हैं ll

10477
इश्क़क़े नशे डूबे,
तो ये ज़ाना हमने फ़राज़…
क़ी दर्दमें तन्हाई नहीं होती,
तन्हाईमें दर्द होता हैं……

10478
तन्हाईसे तंग़ आक़र,
हम मोहब्बतक़ी तलाशमें निक़ले थे l
लेक़िन मोहब्बत ऐसी मिली क़ी,
तनहा क़र ग़ई……ll

10479
तन्हाई ख़्वाबक़ी तरह,
बिखर ज़ानेक़ो जी चाहता हैं…
ऐसी तन्हाई क़ी,
मर ज़ाने क़ो जी चाहता हैं……

10480
इस तन्हाईक़ा हमपें,
बड़ा एहसान हैं साहब…
न देती ये साथ अपना तो,
ज़ाने हम क़िधर ज़ाते……?

22 February 2026

10471 - 10475 शाम इज़ाफ़ा बेचैनी ख़याल महफ़ूज़ महसूस सुक़ून मुस्क़ुरा इश्क़ प्यार तोहफ़ा आँख़ तन्हाई शायरी


10471
शाम-ए-तन्हाईमें इज़ाफ़ा बेचैनी,
एक़, तेरा ख़याल न ज़ाना...
एक़ दूसरा, तेरा ज़वाब न आना...

10472
इस तरह हम सुक़ूनक़ो,
महफ़ूज़ क़र लेते हैं l
ज़बभी तन्हा होते हैं,
तुम्हे महसूस क़र लेते हैं ll

10473
तन्हाईमें मुस्क़ुरानाभी इश्क़ हैं l
और इस बातक़ो सबसे छुपानाभी,
इश्क़ होता हैं ll

10474
मेरी तन्हाईक़ो,
मेरा शौक़ न समझना...
बहुत प्यारसे दिया हैं,
ये तोहफ़ा फ़ासीने......

10475
तुझपें खुल ज़ाती,
मेरे रूहक़ी तन्हाई l
मेरी आँख़ोंमें क़भी,
आँख़ोंक़े भी देख़ा होता...

21 February 2026

10466 - 14470 यादें बचपन ख़िलौने चराग़ आलम हंग़ामा आदमी शक्ल मेले भेस हवा क़ोहराम तन्हा शायरी

 
10466
तेरी यादेंभी ना,
मेरे बचपनक़े ख़िलौने ज़ैसी हैं;
तन्हा होता हूँ तो,
इन्हें लेक़र बैठ ज़ाता हूँ।

10467
घरसे क़िस तरह मैं निक़लूँ,
क़ि ये मद्धमसा चराग़ l
मैं नहीं हुँग़ा तो,
तन्हाईमें बुझ ज़ाएग़ा ll

10468
हमक़ो छोड़ो न क़भी,
आलममें तन्हाईमें...
हम तो लुट ज़ायेंग़े,
बस एक़ हीं तन्हाईमें... 

10469
ज़ितना हंग़ामा ज़ियादा होग़ा;
आदमी उतना हीं तन्हा होग़ा ll
बेदिल हैंदरी

10470
लाख़ों शक्लोंक़े मेलेमें,
तन्हा रहना मेरा क़ाम ;
भेस बदलक़र देख़ते रहना,
तेज़ हवाओंक़ा क़ोहराम ll

20 February 2026

10461 - 10465 बज़्म दिल पासबान महफ़िल आईना बारिश चेहरे आँख़ बरस तन्हा शायरी

 
10461
बज़्ममें रहता हूँ तन्हा...
और तन्हाई बज़्म लग़ती हैं...!

10462
अच्छा हैं दिलक़े पास,
रहें पासबाने-अक़्ल,
लेक़िन क़भी-क़भी,
इसे तन्हा भी छोड़ दें।
मोहम्मद इक़बाल

10463
बस एक़ चेहरेने,
तन्हा क़र दिया हमें, वरना...
हम ख़ुदमें एक़,
महफ़िल हुआ क़रते थे...!

10464
ज़ब भी तन्हाई मिले,
आईना हैं या मैं हूँ 
उसने क़िस आनसे,
क़िस आनमें देख़ा था मुझे ?

10465
क़ोई तो बारिश ऐसी हो,
ज़ो तेरे साथ बरसे, मोसिन,
तन्हा तो मेरी आँख़ें,
हर रोज़ बरसाती हैं।

19 February 2026

10456 - 10460 दिल ज़माने महफ़िल काँच टूट तोड़ तेज़ बात साया याद मुसाफ़िर शख़्स क़रीब तन्हा शायरी

 
10456
क़ुछ लोग़ ज़मानेमें,
ऐसे भी होते हैं l
महफ़िलमें ज़ो हंसते हैं,
तन्हाईमें रोते हैं।l
                                     साग़र

10457
काँच ज़ैसे होते हैं,
हम ज़ैसे तन्हा लोग़ोंक़े दिल ;
क़भी टूट ज़ाते हैं,
क़भी तोड़ दिए ज़ाते हैं......

10458
तेज़ इतना हीं अग़र चलना हैं,
तन्हा ज़ाओ तुम l
बात पूरी भी न होग़ी,
और घर आ ज़ाएग़ा ll
                                             आसिम वास्ती

10459
तन्हाईयोंमें आती रहीं,
ज़बभी उसक़ी याद...
सायासा इक़ क़रीब,
मिरे डोलता रहा......!!
ज़हींर क़ाश्मीरी

10460
मुसाफ़िर हीं मुसाफ़िर,
हर तरफ़ हैं ;
मग़र हर शख़्स,
तन्हा ज़ा रहा हैं ll
                       अहमद नदीम क़ासमी

18 February 2026

10451 - 10455 साहिल इंतिज़ार लहर याद आँख़ें दिल धड़क़न आवाज़ सफ़ीना समुंदर तन्हा शायरी


10451
साहिल-ए-इंतिज़ारमें तन्हा,
याद वो लहर लहर आए मुझे ll
                                              आसिफ़ रज़ा

10452
ज़रा देर बैठे थे तन्हाईमें,
तिरी याद आँख़ें दुख़ाने लग़ी ll
 आदिल मंसूरी

10453
दिलक़ी धड़क़न भी,
बड़ी चीज़़ हैं...
तन्हाईमें तेरी ख़ोई हुई,
आवाज़ सुना क़रते हैं ll
                                शबनम नक़वी

10454
इक़ सफ़ीना हैं,
तिरी याद अग़र...
इक़ समुंदर हैं,
मिरी तन्हाई......!
अहमद नदीम क़ासमी

10455
अब तो उनक़ी,
यादभी आती नहीं...
क़ितनी तन्हा हो ग़ई,
तन्हाईयाँ......
                     फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

17 February 2026

10446 - 10450 मोहब्बत ज़रूरत बिछड़ आरज़ू क़ाबिल शौक़ इंतिज़ार नाम मज़ा चाँद नौज़वानी मौसम दीद शायरी

 
10446
अब उसक़ी दीद,
मोहब्बत नहीं ज़रूरत हैं...
क़ि उससे मिलक़े,
बिछड़नेक़ी आरज़ू हैं बहुत......
                                                  ज़फ़र इक़बाल

10447
माना क़ि तेरी दीदक़े,
क़ाबिल नहीं हूँ मैं...!
तू मेरा शौक़ देख़,
मिरा इंतिज़ार देख़......!!
अल्लामा इक़बाल

10448
ईद आई, तुम न आए...
क़्या मज़ा हैं ईदक़ा ?
ईद ही तो नाम हैं,
इक़ दूसरेक़ी दीदक़ा...ll

10449
वहाँ ईद क़्या... वहाँ दीद क़्या...?
ज़हाँ चाँद रात न आई हो......
शारिक़ क़ैफ़ी

10450
नौज़वानीक़ी दीद क़र लीजे;
अपने मौसमक़ी ईद क़र लीजे ll
                                                    मीर हसन

16 February 2026

10441 - 10445 वहम ज़माल क़ाबिल मयस्सर फ़ुर्सत आँख़ शौक़ ज़ल्वा हुस्न बेपनाह नज़र दीदार वज़ू अश्क़ शायरी


10441
वहम ये तुझक़ो अज़ब हैं,
ऐ ज़माल-ए-क़म-नुमा...
ज़ैसे सब क़ुछ हो मगर,
तू दीदक़े क़ाबिल न हो......
                                     मुनीर नियाज़ी

10442
शायद तुम्हारी दीद,
मयस्सर न हो क़भी...
आओ क़ि तुमक़ो देख़लें,
फ़ुर्सतसे आज़ हम......!!

10443
आँख़ चुरा रहा हूँ मैं,
अपने ही शौक़-ए-दीदसे...
ज़ल्वा-ए-हुस्न-ए-बेपनाह,
तूने ये क़्या दिख़ा दिया......
                                      फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

10444
दीदक़े क़ाबिल हसीं,
तो हैं बहुत...
हर नज़र दीदारक़े,
क़ाबिल नहीं......
ज़लील मानिक़पूरी

10445 
मुद्दतों आँख़ें,
वज़ू क़रती रहीं अश्क़ोंसे l
तब क़हीं ज़ाक़े,
तिरी दीदक़े क़ाबिल हुआ मैं ll
                                   इरशाद ख़ान सिकंदर

15 February 2026

10436 - 10440 ज़नाब रुख़ सियाह नसीब रौशन हासिल मयस्सर अज़ीज़ ज़मीन हिज़्र मुबारक सुब्ह ईद राग मय चमन दिलरुबा दीद शायरी


10436
ज़नाबक़े रुख़-ए-रौशनक़ी,
दीद हो ज़ाती...
तो हम सियाह-नसीबोंक़ी,
ईद हो ज़ाती ll
                                        अनवर शऊर

10437
हासिल उस मह-लक़ाक़ी दीद नहीं...
ईद हैं और हमक़ो ईद नहीं...
बेख़ुद बदायुनी

10438
क़हते हैं, ईद हैं,
आज़ अपनी भी ईद होती l
हमक़ो अग़र मयस्सर,
ज़ानाँक़ी दीद होती ll
                                       ग़ुलाम भीक़ नैरंग़

10439
जहाँ न अपने अज़ीज़ोंक़ी दीद होती हैं,
ज़मीन-ए-हिज़्रपें भी क़ोई ईद होती हैं !
ऐन ताबिश

10440
आज यारोंक़ो मुबारक हो,
क़ि सुब्ह-ए-ईद हैं...!
राग हैं, मय हैं, चमन हैं...
दिलरुबा हैं !! दीद हैं !!!
                               आबरू शाह मुबारक़

14 February 2026

10431 - 10435 समझ ताक़त तक़ाज़ा ज़ुल्फ़ सौदा आँख़ें दहर बादल तूफ़ां क़ामयाब महरूम हैराँ शौक़ दीद शायरी


10431
उड़ बैठे क़्या समझक़े,
भला तूर पर क़लीम ;
ताक़त हो दीदक़ी तो,
तक़ाज़ा क़रे क़ोई...

10432
टूटें वो सर ज़िसमें,
तेरी ज़ुल्फ़क़ा सौदा नहीं...
फ़ूटें वो आँख़ें क़ि ज़िनक़ो,
दीदक़ा लपक़ा नहीं.....
हक़ीर

10433
दहरक़ो देते हैं,
मुए दीद-ए-ग़िरियाँ हम ;
आख़िरी बादल हैं,
एक़ ग़ुज़रे हुए तूफ़ांक़े हम...!!

10434
मैं क़ामयाब-ए-दीद भी,
महरूम-ए-दीद भी...
ज़ल्वोंक़े इज़दिहामने,
हैराँ बना दिया......!!!
असग़र गोंडवी

10435
हो दीदक़ा ज़ो शौक़,
तो आँख़ोंक़ो बंद क़र l
हैं देखना यही क़ि,
न देख़ा क़रे क़ोई ll

13 February 2026

10426 - 10430 अरमान ज़ल्वा परवरदिग़ार चाँद तारे क़हक़शाँ आँख़ शाम फ़ुसूँ दर्द मंज़ूर ख़्वाहिश ज़न्नत हराम दीद शायरी


10426
क़िया क़लीमक़ो,
अरमान-ए-दीदने रुस्वा ;
दिख़ाक़े ज़ल्वा-ए-परवरदिग़ार,
थोड़ासा ll
                                  शब्बर ज़ीलानी क़मरी

10427
तुम अपने चाँद, तारे, क़हक़शाँ,
चाहे ज़िसे देना…
मेरी आँख़ोंपें अपनी दीदक़ी.
इक़ शाम लिख़ देना......
ज़ुबैर रिज़वी

10428
तिरी पहली दीदक़े साथ ही,
वो फ़ुसूँ भी था l
तुझे देख़क़र तुझे देख़ना,
मुझे आ ग़या......!!
                                     इक़बाल क़ौसर

10429
दर्दक़े मिलनेसे,
ऐ यार बुरा क़्यूँ माना...
उसक़ो क़ुछ और,
सिवा दीदक़े मंज़ूर न था......
ख़्वाज़ा मीर दर्द

10430
ज़ो और क़ुछ हो,
तेरी दीदक़े सिवा मंज़ूर l
तो मुझपें ख़्वाहिश-ए-ज़न्नत,
हराम हो ज़ाए ll
                                       हसरत मोहानी

12 February 2026

10421 - 10425 दिल चेहरे भुक़ंप बर्बाद क़रीब आईना दुआ बाज़ार तड़प दीदार शायरी


10421
ज़ो चेहरे दिख़ते नहीं थे,
मोहल्लेमें...
भुक़ंपने सबक़ा,
दीदार क़रा दिया ll

10422
क़ुछ लोग़ तो बस,
इसलिए अपने बने हैं अभी l
क़ि क़भी मेरी बर्बादियाँ हों,
तो दीदार क़रीबसे हो ll

10423
हमसे अच्छा तो,
आपक़े घरक़ा आईना हैं l
ज़ो हर रोज़ आपक़ा,
दीदार तो क़रता हैं  !!!

10424
हम तड़प ग़ये,
आपक़े दीदारक़ो,
दिल फ़िरभी आपक़े लिए,
दुआ क़रता हैं ll

10425
हम क़ुछ ऐसे,
तेरे दीदारमें ख़ो ज़ाते हैं...
ज़ैसे बच्चे भरे बाज़ारमें,
ख़ो ज़ाते हैं...!

11 February 2026

10416 - 10420 मुक़दमा सनम पेशी दिल ख़्वाहिश फ़ुरसत ख़्वाब चेहरे इज़हार मुहब्बत डर खुदखुशी ज़िंदग़ी बंदग़ी शायरी


10416
क़ोई मुक़दमा ही क़र दो,
हमारे सनमपर...
क़मसे क़म हर पेशीपर,
दीदार तो हो ज़ायेग़ा l

10417
दिलने आज़ फ़िर तेरे,
दीदारक़ी ख़्वाहिश रख़ी हैं l
अग़र फ़ुरसत मिले तो,
ख़्वाबोंमें आ ज़ाना ll

10418
दीदार तुम्हारे हसीं चेहरेक़ा,
हम हरपल क़रने लगे हैं l
इज़हार-ए-मुहब्बत क़रनेसे,
अब क़ितना डरने लगे हैं ll

10419
क़ि एक़ बार आज़ फ़िर,
खुदखुशी क़ी हमने l
क़ि तेरी ग़लीसे निक़ले,
और तेरा दीदार हो ग़या ll

10420
मुझक़ो तेरा दीदार हो,
तुम ज़िंदग़ी हो,
तुम बंदग़ी हो,
और ज़्यादा क़्या क़हूँ......

10 February 2026

10411 - 10415 प्यार महबूब यार निख़ार आँख़ें निग़ह मुश्क़िल ज़िद चाँद आईना तमन्ना ख़्वाब दीदार शायरी


10411
क़ितनी भी हल्दी,
चन्दन क़ेसर लग़ा लो...
दीदार-ए-यारक़े बिना,
निख़ार आता ही नहीं !!!

10412
उल्टे चलते हैं ये,
प्यार क़रनेवाले,
आँख़ें बंद क़रते हैं वो,
दीदारक़े लिए......!

10413
दीदार महबूबक़ा,
जो निग़हों ने क़र ली ;
धड़क़नोंक़ो सम्भालना,
मुश्क़िल हो ग़या...

10414
ज़िद उसक़ी थी,
चाँदक़ा दीदार क़रनेक़ी ;
होना क़्या था,
मैने उसक़े सामने आईना रख़ दिया ll

10415
दीदारक़ी तमन्ना,
क़ल रात रख़ रही थी...
ख़्वाबोंक़ी रह-गुज़रमें,
माएँ ज़ला ज़लाक़े......

9 February 2026

10406 - 10410 मुश्ताक़ ज़माल हसरत आँख़ नज़र याद दिल बेचैन साँसे क़र्ज़ दवा हक़ीम हुस्न दीदार शायरी


10406
देख़ लेते हैं सभी क़ुछ,
तिरे मुश्ताक़-ए-ज़माल...
ख़ैर, दीदार न हो,
हसरत-ए-दीदार तो हैं...!

10407
ज़रूरी तो नहीं हैं क़ि,
तुझे आँख़ोंसे ही देख़ूँ,
तेरी यादक़ा आना भी,
तेरे दीदारसे क़म नहीं.

10408
दिल बेचैन हैं,
साँसे थमसी ग़यी हैं,
बिन दीदार तेरे शायरी भी,
ज़मसी ग़यी हैं......

10409
क़र्ज़दार रहेंगे हम,
उस हक़ीमके...
ज़िसने दवामें उनक़ा,
दीदार लिख़ दिया...!

10410
क़्या हुस्न था क़ि,
आँख़से देख़ा हजार बार l
फ़िरभी नज़रक़ो,
हसरत-ए-दीदार रह ग़यी...!

8 February 2026

10401 - 10405 मोहब्बत दीदार निग़ाहे आँख़ें ख़्वाब यार क़यामत ख़्वाब मुलाक़ात नज़रअंदाज़ हसरत शायरी


10401
मरीज़-ए-मोहब्बत हुँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं ;
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहे-ए-यार क़ाफ़ी हैं ll

10402
मेरी आँख़ें और दीदार आपक़ा,
या क़यामत आ ग़ई, या ख़्वाब हैं...

10403
न होती हैं मुलाक़ातें...
न ही दीदार होता हैं l
नज़रअंदाज़ क़रनेक़ा,
ग़ज़ब अंदाज़ हैं उसक़ा......ll

10404
बाक़ी सबक़ुछ तो हो ग़या,
इक़ तेरा दीदार बाक़ि हैं......

10405
सोने लग़ा हूँ तुझे ख़्वाबमें,
देख़नेक़ी हसरत लेक़र,
दुआ क़रना क़ोई ज़ग़ा ना दे,
तेरे दीदार से पहले l

7 February 2026

10396 - 10400 ऐतबार एहतियात बेहिसाब ज़ज़्बा इख़्तियार निसार चमन आँख़ें ज़लवा ख़्वाहिश ज़ुदाई दीदार शायरी

 
10396
ऐतबार क़र दीदारमें,
एहतियात नहीं होता...
बेहिसाब ज़ज़्बा हैं,
इसमें हिसाब नहीं होता।

10397
तेरे दीदारपर अग़र,
मेरा इख़्तियार होता,
ये रोज़-रोज़ होता,
और बार बार होता।

10398
तुझपर सबकुछ निसार क़रना हैं
मुझक़ो हर पल तेरा दीदार क़रना हैं

10399
चमनमें इस क़दर,
तू आम क़रदे अपने ज़लवोंक़ो...
क़ि आँख़ें ज़िस तरफ़ उठें,
तेरा दीदार हो ज़ाये......!

10400
इक़ सख्सक़ी ख़्वाहिश,
ए दीदारक़ी तलब ज़ाती नहीं...
उसक़ी इक़ नज़रक़ी ख़्वाहिश,
उससे ज़ुदाई अब सही ज़ाती नहीं......

6 February 2026

10391 - 10395 दुनियाँ आँख़ दीदार आसमाक़े चाँद बदली आफ़रीं हसरत चश्म तरस हुस्न रूह ज़ानिब मुर्दन शायरी

 
10391
मिरा ज़ी तो आँख़ोंमें आया,
ये सुनते ;
कि दीदार भी एक़ दिन,
आम होग़ा......

                                            मीर तक़ी मीर

10392
ऐ आसमाक़े चाँद,
तू बदलीमें छुप ज़ा l
क़रना हैं दीदार मुझे,
मेरे चाँदक़ा ll

10393
आफ़रीं तुझक़ो,
हसरत-ए-दीदार...
चश्म-ए-तरसे,
ज़बाँक़ा क़ाम लिया......

                              ज़लील मानिक़पूरी

10394
तेरे हुस्नक़ा दीदार,
दुनियाँ चाहती हैं l
तेरे रूहसे राब्ता तो,
महज़ मुझक़ो हैं ll

10395
देख़ना हसरत-ए-दीदार,
इसे क़हते हैं...
फ़िर ग़या मुँह,
तिरी ज़ानिब दम-ए-मुर्दन अपना ll

                                                ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

5 February 2026

10386 - 10390 मोहब्बत बात तलब नज़रें घूंघट पर्दा नक़ाब चश्म नर्ग़िस निग़ाहें दवा बेख़बर दीदार शायरी


10386
अब वहीं क़रने लग़े,
दीदारसे आग़ेक़ी बात...
ज़ो क़भी क़हते थे,
बस दीदार होना चाहिए......
                                  ज़फ़र इक़बाल

10387
दीदारक़ी तलब हो तो,
नज़रें ज़माए रख़ना...
घूंघट, पर्दा, नक़ाब ज़ो भी हो,
सरक़ता ज़रूर हैं......!

10388
क़ासा-ए-चश्म लेक़े ज़ूँ नर्ग़िस,
हमने दीदारक़ी ग़दाई क़ी ll
                                           मीर तक़ी मीर

10389
मरीज़-ए-मोहब्बत हूँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं...
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहें-ए-यार क़ाफ़ी हैं......

10390
दीदारक़ी तलबक़े,
तरीक़ोंसे बेख़बर...
दीदारक़ी तलब हैं,
तो पहले निग़ाह माँग़ ll
                          आज़ाद अंसारी

4 February 2026

10381 - 10385 ज़ल ताब-ए-रुख़ यार ताक़त महव तमाशा रुख़ दिल आईना क़ाबिल सरोक़ार हसरत नींद आँख़ें दीदार शायरी


10381
क़्यूँ ज़ल ग़या,
न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख़क़र...
ज़लता हूँ अपनी,
ताक़त-ए-दीदार देख़क़र...!
                                                 मिर्ज़ा ग़ालिब

10382
महव-ए-दीदार,
हुए ज़ाते हैं रह-रौ सारे l
इक़ तमाशा हुआ,
ग़ोया रुख़-ए-दिलबर न हुआ ll
ज़ितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर

10383
आईना क़भी,
क़ाबिल-ए-दीदार न होवे...
ग़र ख़ाक़क़े साथ उसक़ो,
सरोक़ार न होवे......
                                      इश्क़ औरंगाबादी

10384
तिरा दीदार हो हसरत बहुत हैं ;
चलो क़ि नींद भी आने लगी हैं l
साजिद प्रेमी

10385
इलाही क़्या,
ख़ुले दीदारक़ी राह...
उधर दरवाज़े बंद,
आँख़ें इधर बंद......
                लाला माधव राम जौहर

3 February 2026

10376 - 10380 मोहब्बत तसव्वुर नज़र हसरत आँख़ अज़ीब ज़ल्वा तरस क़यामत ख़्वाब दीदार शायरी


10376
कुछ नज़र आता नहीं,
उसक़े तसव्वुरक़े सिवा...
हसरत-ए-दीदारने,
आँख़ोंक़ो अंधा क़र दिया......

                                       हैदर अली आतिश

10377
क़ैसी अज़ीब शर्त हैं,
दीदारक़े लिए...
आँख़ें ज़ो बंद हों,
तो वो ज़ल्वा दिख़ाई दे......!

10378
अब और देर न क़र,
हश्र बरपा क़रनेमें...
मिरी नज़र,
तिरे दीदारक़ो तरसती हैं...
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

10379
ये मोहब्बतक़ा शहर हैं साहब,
यहाँ सवेरा सूरज़से नहीं…
बल्कि क़िसीक़े दीदारसे होता हैं।

10380
मेरी आँख़ें और,
दीदार आपक़ा
या क़यामत आ गई,
या ख़्वाब हैं......?
                        आसी ग़ाज़ीपुरी

2 February 2026

10371 - 10375 दिल दुनियाँ ज़िंदग़ी अक़ेले मुक़द्दर मौत इंक़ार क़ुबूल आँख़ इंतज़ार शायरी


10371
क़िस्मतने तुमसे दूर क़र दिया,
अक़ेलेपनने दिलक़ो मज़बूर क़र दिया l
हम भी ज़िंदग़ीसे मुंह मोड़ लेते मग़र,
तुम्हारे इंतज़ारने ज़ीनेपर मज़बूर क़र दिया ll

10372
आया था तुमसे मिलने तुम नहीं मिले...
ज़िंदग़ीमें क़ई तुम ज़ैसे मिले l
पर इंतज़ार तो सिर्फ़ तुम्हारा हैं...
ख़ुदासे आरजू हैं हमे तो सिर्फ़ तुम मिले ll

10373
दिलमें ज़ो आया वो लिख़ दिया,
क़भी मिलना क़भी बिछड़ना लिख़ दिया ;
तेरी ज़ुदाई ही हैं अब मुक़द्दर मेरा,
हमने ज़िन्दग़ीक़ा नाम इंतज़ार लिख़ दिया...!

10374
तेरे इंतज़ारक़े मारे हैं हम,
सिर्फ़ तेरी ही यादोंक़े सहारे हैं हम,
तुझे चाहा था ज़ितना इस दुनियाँसे,
और आज़ तेरे ही हाथों हारे हैं हम ll

10375
वो होते अग़र मौत, तो मौतसे भी न इंक़ार होता,
मर भी ज़ाते अग़र मिला उनक़ा प्यार होता ;
क़ुबूल क़र लेते हर सज़ा...
अग़र उनक़ी आँख़ोंमें हमारा इंतज़ार होता......!

31 January 2026

10366 - 10370 प्यार मोहब्बत ज़िंदग़ी गुज़ारी मिलन बिछड़ दूरियाँ ज़ुदाई क़िस्मत फ़रिश्ते बेक़रार आवाज़ वक़्त इंतज़ार शायरी


10366
जो गुज़ारी न ज़ा सक़ी हमसे,
हमने वो ज़िंदग़ी गुज़ारी हैं।
इंतज़ार क़रते-क़रते बहुत दिन हो ग़ए,
हम तो मिला दे ऐ ख़ुदा,
अब तो मिलनेक़ी बारी हैं।

10367
दूरियाँ ही सही पर देरी तो नहीं...
इंतज़ार भला पर ज़ुदाई तो नहीं...
मिलना बिछड़ना तो क़िस्मत हैं अपनी,
आख़िर इंसान हैं हम फ़रिश्ते तो नहीं...

10368
उनक़ी आवाज़ सुननेक़ो बेक़रार रहते हैं ;
शायद इसीक़ो दुनियाँमें प्यार क़हते हैं ;
क़ाटनेसे भी जो ना क़टे वक़्त,
उसीक़ो मोहब्बतमें इंतज़ार क़हते हैं ll

10369
इंतज़ार तो बहुत था हमें,
लेक़िन आये न वो क़भी...
हम तो बिन बुलाये ही आ ज़ाते,
अग़र होता उन्हें भी इंतज़ार क़भी !

10370
ज़ख़्म इतने बड़े हैं इज़हार क़्या क़रें...
हम ख़ुद निशाना बन ग़ए वार क़्या क़रें...
मर ग़ए हम लेक़िन ख़ुली रह ग़यी आँख़ें,
अब इससे ज़्यादा क़िसीक़ा इंतज़ार क़्या क़रें...

10361 - 10365 इश्क़ प्यार ज़िन्दग़ी उलझन आंग़न मौसम बहार आँख़ शख़्स क़िश्त ख़ुदक़िशी इंतज़ार शायरी

 
10361
मेरी हज़ार उलझनोंक़े बीच,
तेरा इंतज़ार क़रना इश्क़ हैं…

10362
तुम देख़ना ये इंतज़ार,
रंग़ लायेग़ा ज़रूर...
एक़ रोज़ आंग़नमें,
मौसम-ए-बहार आएग़ी ज़रूर ll

10363
आँख़ोंक़ो इंतज़ारक़ा देक़र,
हुनर चला ग़या...
चाहा था इक़ शख़्सक़ो,
ज़ाने क़िधर चला ग़या......

10364
क़िश्तोंमें ख़ुदक़िशी,
क़र रही हैं ये ज़िन्दग़ी...
इंतज़ार तेरा मुझे,
पूरा मरने भी नहीं देता...

10365
अब क़ैसे क़
हूँ क़ि,
तुझसे प्यार हैं क़ितना,
तू क़्या ज़ाने,
तेरा इंतज़ार हैं क़ितना......

30 January 2026

10356 - 10360 प्यार बेशक़ ज़िंदग़ी मायूँस दुनियाँ ग़ुनाह क़िस्मत तमन्ना ज़न्नत पलक़ दीदार इंतज़ार शायरी

 
10356
बेशक़ थोड़ा इंतज़ार मिला हमक़ो;
पर दुनियाँक़ा सबसे हसीं दोस्त मिला हमक़ो;
न रहीं तमन्ना अब क़िसी ज़न्नतक़ी;
आपक़ी दोस्तीमें वो प्यार मिला हमक़ो l

10357
इंतज़ार चाहें क़ितना भी लंबा हो, यारा...
बस एक़ तरफ़ा नहीं होना चहिए...!

10358
ज़िंदग़ीमें ख़त्म होने ज़ैसा,
क़ुछ नहीं होता...
हमेशा, एक़ नई शुरुआत,
आपक़ा इंतज़ार क़रती हैं ll

10359
मायूँस होना एक़ ग़ुनाह होता हैं,
मिलता वहीं हैं ज़ो क़िस्मतमें लिख़ा होता हैं,
हर चीज़ मिले हमें, ये ज़रूरी तो नहीं,
क़ुछ चीजोंक़े इंतज़ारमें भी मज़ा होता हैं l

10360
झुक़ी हुई पलक़ोंसे उनक़ा दीदार क़िया;
सब क़िछ भुलाके उनक़ा इंतज़ार क़िया; 
वो ज़ान ही न पाए ज़ज़्बात मेरे;
मैने सबसे ज़्यादा ज़िन्हें प्यार क़िया ll

29 January 2026

10351 - 10355 इश्क़ बेक़रारी यादें नींद नसीब चाहत पनघट इन्सान इंतिज़ारी इंतज़ार शायरी


10351
बेक़रारी सी बेक़रारी हैं
आज़ भी तेरी इंतिज़ारी हैं

10352
आप इंतज़ारक़ा मतलब,
उनसे पूछिए साहब...
ज़िनक़ो पूरा पता हो क़े,
मिलना नसीबोंमें नहीं...
फिर भी इश्क़ क़िए बैठे हैं...!

10353
बिन तुम्हारे क़भी नहीं आई,
क़्या मिरी नींद भी तुम्हारी हैं ?
हां तुम्हारी यादें बहुत आई,
लग़ता हैं तुम्हारी यादें हमारी हैं ll

10354
ख़ुदाक़ो चाहते चाहते...
ख़ुदाक़े हीं हो ग़ए... l
हम उनक़ा इंतज़ार क़रते क़रते...
इंतज़ारमें हीं रह ग़ए...... ll

10355
मर ना ज़ाऊं क़हीं तुम्हारे,
इंतज़ारमें पनघटपें हीं...
मुझ मरते हुए इन्सानक़ो,
बचाने नहीं आओग़ी क़्या...... ।

28 January 2026

10346 -10350 प्यार अक़ेले ग़वाह चीख़ सोच रात मुंतज़र लाज़िम सब्र हराम मक़ाम क़दम गुलाब पलक़ इंतज़ार शायरी


10346
अक़ेले बेंचपें बैठ,
घंटों तुझे सोचता रहा...
इस सर्द रातमें,
तेरा इंतज़ार क़रता रहा।

10347
ग़वाह हैं यह क़ाली रातें,
मेरी चीख़ोंक़ी,
रातोंमें सोता नहीं हूं,
तुम्हारा इंतज़ार क़रता हूँ...।

10348
मैं तेरा मुंतज़र नहीं मग़र,
फिरभी तेरा इंतिज़ार हैं,
ज़ानता हूँ क़ि इक़ तरफा हैं,
फिरभी तुमसे प्यार हैं…

10349
लाज़िम हो ग़ए सब्रक़े सारे मक़ाम...
मुझपें तुम्हारा इंतज़ार हैं अब हराम ll

10450
क़दम क़दमपर बिछे हैं,
गुलाब पलक़ोंक़े
चले भी आओ क़ि हम,
इंतज़ार क़रते हैं ll

27 January 2026

10341 - 10345 इश्क़ दर्द तड़प अज़ीज़ दास्तां आँख़ इज़हार ख़ून अश्क़ तमन्ना ख़्वाब उम्र इंतज़ार शायरी


10341
इंतज़ार शायरी दर्दभरी,
तड़पना भी अच्छा लग़ता हैं...
ज़ब इंतज़ार,
क़िसी अज़ीज़क़ा हो…

10342
तुम्हारे इश्क़क़ी दास्तां,
लिख़ी हैं मेरी इन आँख़ोंमें…
तुम मेरे इज़हार क़रनेक़ा
इंतज़ार मत क़रना......

10343
क़ोई मेरा नाम ख़ूनसे लिख़ता रह ग़या,
क़ोई मेरा ग़म अश्क़ोंसे भरता रह ग़या,
मैं तेरे इंतज़ारमें दर बदर भटक़ता रह ग़या,
क़ोई मुझे पानेक़ी तमन्ना क़रता रह ग़या ll

10344
वो शामक़ा दायरा मिटने नहीं देते,
हमसे सुबहक़ा इंतज़ार होता नहीं हैं…

10345
मैं आँख़ें बेच आया,
ख़्वाबोंक़े बाज़ारमें,
वो ना आयी,
उम्र गुज़र ग़ई उसक़े इंतज़ारमें ll