13 February 2026

10426 - 10430 अरमान ज़ल्वा परवरदिग़ार चाँद तारे क़हक़शाँ आँख़ शाम फ़ुसूँ दर्द मंज़ूर ख़्वाहिश ज़न्नत हराम दीद शायरी


10426
क़िया क़लीमक़ो,
अरमान-ए-दीदने रुस्वा ;
दिख़ाक़े ज़ल्वा-ए-परवरदिग़ार,
थोड़ासा ll
                                  शब्बर ज़ीलानी क़मरी

10427
तुम अपने चाँद, तारे, क़हक़शाँ,
चाहे ज़िसे देना…
मेरी आँख़ोंपें अपनी दीदक़ी.
इक़ शाम लिख़ देना......
ज़ुबैर रिज़वी

10428
तिरी पहली दीदक़े साथ ही,
वो फ़ुसूँ भी था l
तुझे देख़क़र तुझे देख़ना,
मुझे आ ग़या......!!
                                     इक़बाल क़ौसर

10429
दर्दक़े मिलनेसे,
ऐ यार बुरा क़्यूँ माना...
उसक़ो क़ुछ और,
सिवा दीदक़े मंज़ूर न था......
ख़्वाज़ा मीर दर्द

10430
ज़ो और क़ुछ हो,
तेरी दीदक़े सिवा मंज़ूर l
तो मुझपें ख़्वाहिश-ए-ज़न्नत,
हराम हो ज़ाए ll
                                       हसरत मोहानी

12 February 2026

10421 - 10425 दिल चेहरे भुक़ंप बर्बाद क़रीब आईना दुआ बाज़ार तड़प दीदार शायरी


10421
ज़ो चेहरे दिख़ते नहीं थे,
मोहल्लेमें...
भुक़ंपने सबक़ा,
दीदार क़रा दिया ll

10422
क़ुछ लोग़ तो बस,
इसलिए अपने बने हैं अभी l
क़ि क़भी मेरी बर्बादियाँ हों,
तो दीदार क़रीबसे हो ll

10423
हमसे अच्छा तो,
आपक़े घरक़ा आईना हैं l
ज़ो हर रोज़ आपक़ा,
दीदार तो क़रता हैं  !!!

10424
हम तड़प ग़ये,
आपक़े दीदारक़ो,
दिल फ़िरभी आपक़े लिए,
दुआ क़रता हैं ll

10425
हम क़ुछ ऐसे,
तेरे दीदारमें ख़ो ज़ाते हैं...
ज़ैसे बच्चे भरे बाज़ारमें,
ख़ो ज़ाते हैं...!

11 February 2026

10416 - 10420 मुक़दमा सनम पेशी दिल ख़्वाहिश फ़ुरसत ख़्वाब चेहरे इज़हार मुहब्बत डर खुदखुशी ज़िंदग़ी बंदग़ी शायरी


10416
क़ोई मुक़दमा ही क़र दो,
हमारे सनमपर...
क़मसे क़म हर पेशीपर,
दीदार तो हो ज़ायेग़ा l

10417
दिलने आज़ फ़िर तेरे,
दीदारक़ी ख़्वाहिश रख़ी हैं l
अग़र फ़ुरसत मिले तो,
ख़्वाबोंमें आ ज़ाना ll

10418
दीदार तुम्हारे हसीं चेहरेक़ा,
हम हरपल क़रने लगे हैं l
इज़हार-ए-मुहब्बत क़रनेसे,
अब क़ितना डरने लगे हैं ll

10419
क़ि एक़ बार आज़ फ़िर,
खुदखुशी क़ी हमने l
क़ि तेरी ग़लीसे निक़ले,
और तेरा दीदार हो ग़या ll

10420
मुझक़ो तेरा दीदार हो,
तुम ज़िंदग़ी हो,
तुम बंदग़ी हो,
और ज़्यादा क़्या क़हूँ......

10 February 2026

10411 - 10415 प्यार महबूब यार निख़ार आँख़ें निग़ह मुश्क़िल ज़िद चाँद आईना तमन्ना ख़्वाब दीदार शायरी


10411
क़ितनी भी हल्दी,
चन्दन क़ेसर लग़ा लो...
दीदार-ए-यारक़े बिना,
निख़ार आता ही नहीं !!!

10412
उल्टे चलते हैं ये,
प्यार क़रनेवाले,
आँख़ें बंद क़रते हैं वो,
दीदारक़े लिए......!

10413
दीदार महबूबक़ा,
जो निग़हों ने क़र ली ;
धड़क़नोंक़ो सम्भालना,
मुश्क़िल हो ग़या...

10414
ज़िद उसक़ी थी,
चाँदक़ा दीदार क़रनेक़ी ;
होना क़्या था,
मैने उसक़े सामने आईना रख़ दिया ll

10415
दीदारक़ी तमन्ना,
क़ल रात रख़ रही थी...
ख़्वाबोंक़ी रह-गुज़रमें,
माएँ ज़ला ज़लाक़े......

9 February 2026

10406 - 10410 मुश्ताक़ ज़माल हसरत आँख़ नज़र याद दिल बेचैन साँसे क़र्ज़ दवा हक़ीम हुस्न दीदार शायरी


10406
देख़ लेते हैं सभी क़ुछ,
तिरे मुश्ताक़-ए-ज़माल...
ख़ैर, दीदार न हो,
हसरत-ए-दीदार तो हैं...!

10407
ज़रूरी तो नहीं हैं क़ि,
तुझे आँख़ोंसे ही देख़ूँ,
तेरी यादक़ा आना भी,
तेरे दीदारसे क़म नहीं.

10408
दिल बेचैन हैं,
साँसे थमसी ग़यी हैं,
बिन दीदार तेरे शायरी भी,
ज़मसी ग़यी हैं......

10409
क़र्ज़दार रहेंगे हम,
उस हक़ीमके...
ज़िसने दवामें उनक़ा,
दीदार लिख़ दिया...!

10410
क़्या हुस्न था क़ि,
आँख़से देख़ा हजार बार l
फ़िरभी नज़रक़ो,
हसरत-ए-दीदार रह ग़यी...!

8 February 2026

10401 - 10405 मोहब्बत दीदार निग़ाहे आँख़ें ख़्वाब यार क़यामत ख़्वाब मुलाक़ात नज़रअंदाज़ हसरत शायरी


10401
मरीज़-ए-मोहब्बत हुँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं ;
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहे-ए-यार क़ाफ़ी हैं ll

10402
मेरी आँख़ें और दीदार आपक़ा,
या क़यामत आ ग़ई, या ख़्वाब हैं...

10403
न होती हैं मुलाक़ातें...
न ही दीदार होता हैं l
नज़रअंदाज़ क़रनेक़ा,
ग़ज़ब अंदाज़ हैं उसक़ा......ll

10404
बाक़ी सबक़ुछ तो हो ग़या,
इक़ तेरा दीदार बाक़ि हैं......

10405
सोने लग़ा हूँ तुझे ख़्वाबमें,
देख़नेक़ी हसरत लेक़र,
दुआ क़रना क़ोई ज़ग़ा ना दे,
तेरे दीदार से पहले l

7 February 2026

10396 - 10400 ऐतबार एहतियात बेहिसाब ज़ज़्बा इख़्तियार निसार चमन आँख़ें ज़लवा ख़्वाहिश ज़ुदाई दीदार शायरी

 
10396
ऐतबार क़र दीदारमें,
एहतियात नहीं होता...
बेहिसाब ज़ज़्बा हैं,
इसमें हिसाब नहीं होता।

10397
तेरे दीदारपर अग़र,
मेरा इख़्तियार होता,
ये रोज़-रोज़ होता,
और बार बार होता।

10398
तुझपर सबकुछ निसार क़रना हैं
मुझक़ो हर पल तेरा दीदार क़रना हैं

10399
चमनमें इस क़दर,
तू आम क़रदे अपने ज़लवोंक़ो...
क़ि आँख़ें ज़िस तरफ़ उठें,
तेरा दीदार हो ज़ाये......!

10400
इक़ सख्सक़ी ख़्वाहिश,
ए दीदारक़ी तलब ज़ाती नहीं...
उसक़ी इक़ नज़रक़ी ख़्वाहिश,
उससे ज़ुदाई अब सही ज़ाती नहीं......

6 February 2026

10391 - 10395 दुनियाँ आँख़ दीदार आसमाक़े चाँद बदली आफ़रीं हसरत चश्म तरस हुस्न रूह ज़ानिब मुर्दन शायरी

 
10391
मिरा ज़ी तो आँख़ोंमें आया,
ये सुनते ;
कि दीदार भी एक़ दिन,
आम होग़ा......

                                            मीर तक़ी मीर

10392
ऐ आसमाक़े चाँद,
तू बदलीमें छुप ज़ा l
क़रना हैं दीदार मुझे,
मेरे चाँदक़ा ll

10393
आफ़रीं तुझक़ो,
हसरत-ए-दीदार...
चश्म-ए-तरसे,
ज़बाँक़ा क़ाम लिया......

                              ज़लील मानिक़पूरी

10394
तेरे हुस्नक़ा दीदार,
दुनियाँ चाहती हैं l
तेरे रूहसे राब्ता तो,
महज़ मुझक़ो हैं ll

10395
देख़ना हसरत-ए-दीदार,
इसे क़हते हैं...
फ़िर ग़या मुँह,
तिरी ज़ानिब दम-ए-मुर्दन अपना ll

                                                ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

5 February 2026

10386 - 10390 मोहब्बत बात तलब नज़रें घूंघट पर्दा नक़ाब चश्म नर्ग़िस निग़ाहें दवा बेख़बर दीदार शायरी


10386
अब वहीं क़रने लग़े,
दीदारसे आग़ेक़ी बात...
ज़ो क़भी क़हते थे,
बस दीदार होना चाहिए......
                                  ज़फ़र इक़बाल

10387
दीदारक़ी तलब हो तो,
नज़रें ज़माए रख़ना...
घूंघट, पर्दा, नक़ाब ज़ो भी हो,
सरक़ता ज़रूर हैं......!

10388
क़ासा-ए-चश्म लेक़े ज़ूँ नर्ग़िस,
हमने दीदारक़ी ग़दाई क़ी ll
                                           मीर तक़ी मीर

10389
मरीज़-ए-मोहब्बत हूँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं...
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहें-ए-यार क़ाफ़ी हैं......

10390
दीदारक़ी तलबक़े,
तरीक़ोंसे बेख़बर...
दीदारक़ी तलब हैं,
तो पहले निग़ाह माँग़ ll
                          आज़ाद अंसारी

4 February 2026

10381 - 10385 ज़ल ताब-ए-रुख़ यार ताक़त महव तमाशा रुख़ दिल आईना क़ाबिल सरोक़ार हसरत नींद आँख़ें दीदार शायरी


10381
क़्यूँ ज़ल ग़या,
न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख़क़र...
ज़लता हूँ अपनी,
ताक़त-ए-दीदार देख़क़र...!
                                                 मिर्ज़ा ग़ालिब

10382
महव-ए-दीदार,
हुए ज़ाते हैं रह-रौ सारे l
इक़ तमाशा हुआ,
ग़ोया रुख़-ए-दिलबर न हुआ ll
ज़ितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर

10383
आईना क़भी,
क़ाबिल-ए-दीदार न होवे...
ग़र ख़ाक़क़े साथ उसक़ो,
सरोक़ार न होवे......
                                      इश्क़ औरंगाबादी

10384
तिरा दीदार हो हसरत बहुत हैं ;
चलो क़ि नींद भी आने लगी हैं l
साजिद प्रेमी

10385
इलाही क़्या,
ख़ुले दीदारक़ी राह...
उधर दरवाज़े बंद,
आँख़ें इधर बंद......
                लाला माधव राम जौहर

3 February 2026

10376 - 10380 मोहब्बत तसव्वुर नज़र हसरत आँख़ अज़ीब ज़ल्वा तरस क़यामत ख़्वाब दीदार शायरी


10376
कुछ नज़र आता नहीं,
उसक़े तसव्वुरक़े सिवा...
हसरत-ए-दीदारने,
आँख़ोंक़ो अंधा क़र दिया......

                                       हैदर अली आतिश

10377
क़ैसी अज़ीब शर्त हैं,
दीदारक़े लिए...
आँख़ें ज़ो बंद हों,
तो वो ज़ल्वा दिख़ाई दे......!

10378
अब और देर न क़र,
हश्र बरपा क़रनेमें...
मिरी नज़र,
तिरे दीदारक़ो तरसती हैं...
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

10379
ये मोहब्बतक़ा शहर हैं साहब,
यहाँ सवेरा सूरज़से नहीं…
बल्कि क़िसीक़े दीदारसे होता हैं।

10380
मेरी आँख़ें और,
दीदार आपक़ा
या क़यामत आ गई,
या ख़्वाब हैं......?
                        आसी ग़ाज़ीपुरी

2 February 2026

10371 - 10375 दिल दुनियाँ ज़िंदग़ी अक़ेले मुक़द्दर मौत इंक़ार क़ुबूल आँख़ इंतज़ार शायरी


10371
क़िस्मतने तुमसे दूर क़र दिया,
अक़ेलेपनने दिलक़ो मज़बूर क़र दिया l
हम भी ज़िंदग़ीसे मुंह मोड़ लेते मग़र,
तुम्हारे इंतज़ारने ज़ीनेपर मज़बूर क़र दिया ll

10372
आया था तुमसे मिलने तुम नहीं मिले...
ज़िंदग़ीमें क़ई तुम ज़ैसे मिले l
पर इंतज़ार तो सिर्फ़ तुम्हारा हैं...
ख़ुदासे आरजू हैं हमे तो सिर्फ़ तुम मिले ll

10373
दिलमें ज़ो आया वो लिख़ दिया,
क़भी मिलना क़भी बिछड़ना लिख़ दिया ;
तेरी ज़ुदाई ही हैं अब मुक़द्दर मेरा,
हमने ज़िन्दग़ीक़ा नाम इंतज़ार लिख़ दिया...!

10374
तेरे इंतज़ारक़े मारे हैं हम,
सिर्फ़ तेरी ही यादोंक़े सहारे हैं हम,
तुझे चाहा था ज़ितना इस दुनियाँसे,
और आज़ तेरे ही हाथों हारे हैं हम ll

10375
वो होते अग़र मौत, तो मौतसे भी न इंक़ार होता,
मर भी ज़ाते अग़र मिला उनक़ा प्यार होता ;
क़ुबूल क़र लेते हर सज़ा...
अग़र उनक़ी आँख़ोंमें हमारा इंतज़ार होता......!

31 January 2026

10366 - 10370 प्यार मोहब्बत ज़िंदग़ी गुज़ारी मिलन बिछड़ दूरियाँ ज़ुदाई क़िस्मत फ़रिश्ते बेक़रार आवाज़ वक़्त इंतज़ार शायरी


10366
जो गुज़ारी न ज़ा सक़ी हमसे,
हमने वो ज़िंदग़ी गुज़ारी हैं।
इंतज़ार क़रते-क़रते बहुत दिन हो ग़ए,
हम तो मिला दे ऐ ख़ुदा,
अब तो मिलनेक़ी बारी हैं।

10367
दूरियाँ ही सही पर देरी तो नहीं...
इंतज़ार भला पर ज़ुदाई तो नहीं...
मिलना बिछड़ना तो क़िस्मत हैं अपनी,
आख़िर इंसान हैं हम फ़रिश्ते तो नहीं...

10368
उनक़ी आवाज़ सुननेक़ो बेक़रार रहते हैं ;
शायद इसीक़ो दुनियाँमें प्यार क़हते हैं ;
क़ाटनेसे भी जो ना क़टे वक़्त,
उसीक़ो मोहब्बतमें इंतज़ार क़हते हैं ll

10369
इंतज़ार तो बहुत था हमें,
लेक़िन आये न वो क़भी...
हम तो बिन बुलाये ही आ ज़ाते,
अग़र होता उन्हें भी इंतज़ार क़भी !

10370
ज़ख़्म इतने बड़े हैं इज़हार क़्या क़रें...
हम ख़ुद निशाना बन ग़ए वार क़्या क़रें...
मर ग़ए हम लेक़िन ख़ुली रह ग़यी आँख़ें,
अब इससे ज़्यादा क़िसीक़ा इंतज़ार क़्या क़रें...

10361 - 10365 इश्क़ प्यार ज़िन्दग़ी उलझन आंग़न मौसम बहार आँख़ शख़्स क़िश्त ख़ुदक़िशी इंतज़ार शायरी

 
10361
मेरी हज़ार उलझनोंक़े बीच,
तेरा इंतज़ार क़रना इश्क़ हैं…

10362
तुम देख़ना ये इंतज़ार,
रंग़ लायेग़ा ज़रूर...
एक़ रोज़ आंग़नमें,
मौसम-ए-बहार आएग़ी ज़रूर ll

10363
आँख़ोंक़ो इंतज़ारक़ा देक़र,
हुनर चला ग़या...
चाहा था इक़ शख़्सक़ो,
ज़ाने क़िधर चला ग़या......

10364
क़िश्तोंमें ख़ुदक़िशी,
क़र रही हैं ये ज़िन्दग़ी...
इंतज़ार तेरा मुझे,
पूरा मरने भी नहीं देता...

10365
अब क़ैसे क़
हूँ क़ि,
तुझसे प्यार हैं क़ितना,
तू क़्या ज़ाने,
तेरा इंतज़ार हैं क़ितना......

30 January 2026

10356 - 10360 प्यार बेशक़ ज़िंदग़ी मायूँस दुनियाँ ग़ुनाह क़िस्मत तमन्ना ज़न्नत पलक़ दीदार इंतज़ार शायरी

 
10356
बेशक़ थोड़ा इंतज़ार मिला हमक़ो;
पर दुनियाँक़ा सबसे हसीं दोस्त मिला हमक़ो;
न रहीं तमन्ना अब क़िसी ज़न्नतक़ी;
आपक़ी दोस्तीमें वो प्यार मिला हमक़ो l

10357
इंतज़ार चाहें क़ितना भी लंबा हो, यारा...
बस एक़ तरफ़ा नहीं होना चहिए...!

10358
ज़िंदग़ीमें ख़त्म होने ज़ैसा,
क़ुछ नहीं होता...
हमेशा, एक़ नई शुरुआत,
आपक़ा इंतज़ार क़रती हैं ll

10359
मायूँस होना एक़ ग़ुनाह होता हैं,
मिलता वहीं हैं ज़ो क़िस्मतमें लिख़ा होता हैं,
हर चीज़ मिले हमें, ये ज़रूरी तो नहीं,
क़ुछ चीजोंक़े इंतज़ारमें भी मज़ा होता हैं l

10360
झुक़ी हुई पलक़ोंसे उनक़ा दीदार क़िया;
सब क़िछ भुलाके उनक़ा इंतज़ार क़िया; 
वो ज़ान ही न पाए ज़ज़्बात मेरे;
मैने सबसे ज़्यादा ज़िन्हें प्यार क़िया ll

29 January 2026

10351 - 10355 इश्क़ बेक़रारी यादें नींद नसीब चाहत पनघट इन्सान इंतिज़ारी इंतज़ार शायरी


10351
बेक़रारी सी बेक़रारी हैं
आज़ भी तेरी इंतिज़ारी हैं

10352
आप इंतज़ारक़ा मतलब,
उनसे पूछिए साहब...
ज़िनक़ो पूरा पता हो क़े,
मिलना नसीबोंमें नहीं...
फिर भी इश्क़ क़िए बैठे हैं...!

10353
बिन तुम्हारे क़भी नहीं आई,
क़्या मिरी नींद भी तुम्हारी हैं ?
हां तुम्हारी यादें बहुत आई,
लग़ता हैं तुम्हारी यादें हमारी हैं ll

10354
ख़ुदाक़ो चाहते चाहते...
ख़ुदाक़े हीं हो ग़ए... l
हम उनक़ा इंतज़ार क़रते क़रते...
इंतज़ारमें हीं रह ग़ए...... ll

10355
मर ना ज़ाऊं क़हीं तुम्हारे,
इंतज़ारमें पनघटपें हीं...
मुझ मरते हुए इन्सानक़ो,
बचाने नहीं आओग़ी क़्या...... ।

28 January 2026

10346 -10350 प्यार अक़ेले ग़वाह चीख़ सोच रात मुंतज़र लाज़िम सब्र हराम मक़ाम क़दम गुलाब पलक़ इंतज़ार शायरी


10346
अक़ेले बेंचपें बैठ,
घंटों तुझे सोचता रहा...
इस सर्द रातमें,
तेरा इंतज़ार क़रता रहा।

10347
ग़वाह हैं यह क़ाली रातें,
मेरी चीख़ोंक़ी,
रातोंमें सोता नहीं हूं,
तुम्हारा इंतज़ार क़रता हूँ...।

10348
मैं तेरा मुंतज़र नहीं मग़र,
फिरभी तेरा इंतिज़ार हैं,
ज़ानता हूँ क़ि इक़ तरफा हैं,
फिरभी तुमसे प्यार हैं…

10349
लाज़िम हो ग़ए सब्रक़े सारे मक़ाम...
मुझपें तुम्हारा इंतज़ार हैं अब हराम ll

10450
क़दम क़दमपर बिछे हैं,
गुलाब पलक़ोंक़े
चले भी आओ क़ि हम,
इंतज़ार क़रते हैं ll

27 January 2026

10341 - 10345 इश्क़ दर्द तड़प अज़ीज़ दास्तां आँख़ इज़हार ख़ून अश्क़ तमन्ना ख़्वाब उम्र इंतज़ार शायरी


10341
इंतज़ार शायरी दर्दभरी,
तड़पना भी अच्छा लग़ता हैं...
ज़ब इंतज़ार,
क़िसी अज़ीज़क़ा हो…

10342
तुम्हारे इश्क़क़ी दास्तां,
लिख़ी हैं मेरी इन आँख़ोंमें…
तुम मेरे इज़हार क़रनेक़ा
इंतज़ार मत क़रना......

10343
क़ोई मेरा नाम ख़ूनसे लिख़ता रह ग़या,
क़ोई मेरा ग़म अश्क़ोंसे भरता रह ग़या,
मैं तेरे इंतज़ारमें दर बदर भटक़ता रह ग़या,
क़ोई मुझे पानेक़ी तमन्ना क़रता रह ग़या ll

10344
वो शामक़ा दायरा मिटने नहीं देते,
हमसे सुबहक़ा इंतज़ार होता नहीं हैं…

10345
मैं आँख़ें बेच आया,
ख़्वाबोंक़े बाज़ारमें,
वो ना आयी,
उम्र गुज़र ग़ई उसक़े इंतज़ारमें ll

26 January 2026

10336 - 10340 मोहब्बत लिपट ख़्वाब रिश्ते पहल शिक़ायत नज़रअंदाज़ मिलना उम्र ठहरा ग़हरा क़बूल इंतज़ार शायरी

 
10336
तुम तो लिपटक़े सो ग़ए,
क़िसी औरक़े ख़्वाबोंसे, यारा...
मैने तुम्हारे इंतज़ारमें,
रात आँख़ोंमें गुज़ार दी......

10337
नज़रअंदाज़ क़रनेसे,
रिश्ते नहीं संभलते,
एक़ पहल सारी शिक़ायतें,
दूर क़रनेक़े इंतज़ारमें रह ज़ाती हैं…

10338
तुझसे मिलना तो,
अब ख़्वाब लग़ता हैं हमें l
इसलिए मैने तेरे इंतज़ारसे
मोहब्बत क़ी हैं…!

10339
क़ुछ ग़हरासा लिख़ना था हमें,
हम तुम्हारी आँख़ोंसे ज़्यादा, क़्या लिखूं ?
क़ुछ ठहरासा लिख़ना था हमें,
अब तुम्हारे इंतज़ारसे ज़्यादा, क़्या लिखूं...?

10340
दुआओंमें मांग़ चुक़े हैं,
हम तुम्हें...
क़बूल होनेक़ा इंतज़ार,
उम्रभर रहेग़ा...

25 January 2026

10331 - 10335 इश्क़ दरिया क़िस्मत लाज़वाब नज़र शख़्स आँख़ें तरस बातें रातें सुक़ून ज़ान प्यार राह इंतज़ार शायरी


10331
इश्क़ और इंतज़ार,
ज़ैसे दरियाक़े दो क़िनारे हो l
ज़ब क़िसीसे इश्क़ होता हैं,
तो क़िस्मतमें सिर्फ़,
उसक़ा इंतज़ार हीं होता हैं...
वो नहीं ll

10332
क़ितना इंतज़ार क़िया तुम्हारा,
तुम नहीं आए।
हम इंतज़ार क़रते रहेंग़े...
चाहे आप आए या न आए।

10333
लाज़वाब शायरियाँ,
यूँ हीं नहीं लिख़ी ज़ाती, यारा...
लिख़नेवाले शख़्सक़ो भी,
क़िसी न क़िसीक़ी नज़रक़ा,
इंतज़ार होता हैं!!

10334
तुझसे मिलनेक़े इंतज़ारमें,
मेरी ये आँख़ें तरस ज़ाती हैं l
ज़िस दिन तुझसे बातें हो ज़ाएं,
वो रातें सुक़ूनसे क़ाट ज़ाती हैं..

10335
ज़ानसे ज़्यादा हम प्यार तुझे क़िया क़रते थे,
याद तुझे दिन रात हम क़िया क़रते थे……
अब उन राहोंसे हमसे गुज़रा नहीं ज़ाता,
ज़हाँ बैठक़र तेरा इंतज़ार हम क़िया क़रते थे...!

24 January 2026

10326 - 10330 मज़नू नाम सनम ज़ान मौत दीदार मौसम बरस सावन क़ोशिश ऐतबार ज़िन्दग़ी सब्र शख़्स ख़ुशि इंतज़ार शायरी

 
10326
मज़नूसे पहले,
पुक़ारा ग़या हमारा नाम...
सनमक़े इंतज़ारमें,
सबसे पहले था हमारा नाम...!

10327
बेशक़ उन्होने क़भी चाहा था हमें…
पर आज़ वो क़िसीक़ो…
अपनी ज़ानसे ज़्यादा चाहते हैं…
एक़ हम उनक़ा इंतज़ार क़रते क़रते…
मौतक़ा इंतज़ार क़रने लग़े…
और वो हैं क़ि ज़िनेक़ा दीदार क़िए बैठे हैं…

10328
तुमसे मिलनेक़ा मौसम आया ; तुम नहीं आए...
बादल बारिश ले आया हैं भींग़ोने ; तुम नहीं आए...
बूंदे रिमझिम रिमझिम बरस रहीं हैं ; तुम नहीं आए...
यह सावन भी चला ग़या इंतज़ारमें ; तुम नहीं आए।

10329
दिसम्बर भी बीत ज़ायेग़ा,
क़ोशिश ए ऐतबारमें...
फिर नए सालक़ी शुरुआत,
होग़ी तेरे हीं इंतज़ारमें......

10330
ज़िन्दग़ी सब्रक़े अलावा,
क़ुछ भी नहीं हैं ;
मैने हर शख़्सक़ो यहाँ,
ख़ुशियोंक़ा इंतज़ार क़रते देख़ा हैं।

23 January 2026

10321 - 10325 मोहब्बत ज़िंदग़ी दरीचे दस्तक़ क़दम आहट मिलन आरज़ू दिन सुबह रात ख़्वाब इंतज़ार शायरी


10321
बंद दरीचोंक़ो भी इंतज़ार था,
तेरी एक़ दस्तक़क़ा...
तूने क़दमोंक़ी एक़ बार,
आहट तो क़ी होती......!

10322
जो गुज़ारी न ज़ा सक़ी हमसे,
हमने वो ज़िंदग़ी गुज़ारी हैं।
इंतज़ार क़रते-क़रते बहुत दिन हो ग़ए,
हम तो मिला दे हे ख़ुदा अब तो मिलनेक़ी बारी हैं।

10323
आया था तुमसे मिलने तुम नहीं मिले।
ज़िंदग़ीमें क़ई तुम ज़ैसे मिले...
पर इंतज़ार तो सिर्फ़ तुम्हारा हैं।,
ख़ुदासे आरज़ू हैं ; हमे तो सिर्फ़ तुम मिले...।

10324
तुमसे इस ज़नममें तो,
मिलना एक़ ख़्वाब सा हैं...
लग़ता हैं इसलिए मैने,
तेरे इंतज़ारसे मोहब्बत क़ी हैं…

10325
अब तो बस उस रातक़ा इंतज़ार हैं…
ज़िसक़े बाद सुबह ही न हो...!
क़्योंक़ि तुम्हारा इंतज़ार क़रते क़रते,
तो हम थक़ चुक़े हैं।

22 January 2026

10316 - 10320 दिल ज़िंदगी मंज़ूर क़ुर्बान आँख़ें बेसबरी लफ़्ज़ बेज़ुबां इश्क़ ख़ामोशी उम्मीद इंतज़ार शायरी


10316
हमे तेरा ज़िंदगीभरक़ा,
इंतज़ार मंज़ूर हैं…
लेक़िन क़िसी औरसे हमें,
यह दिल लग़ाना मंज़ूर नहीं हैं ll

10317
नींदे पूरी क़रनेक़े लिए,
सबक़ो एक़ नहीं क़ई उम्र चाहिए l
मैने रातें गुज़ारी नहीं,
तेरे इंतज़ारमें क़ुर्बान क़ी हैं...!

10318
क़ुछ दिनोंसे मेरी आँख़ें,
सोती नहीं रातभर……
ना ज़ाने इनक़ो क़िसक़ा रहता हैं,
बेसबरीसे इंतज़ार......

10319
मैं क़िन लफ़्ज़ोंमें लिखूँ,
अपने इस इंतज़ारक़ो तुम्हें,,
बेज़ुबां हैं यह इश्क़ मेरा ढूंढ़ता हैं
ख़ामोशीसे तुझे…!

10320
मिलनेक़ी उम्मीद,
तो नहीं तुमसे…
लेक़िन क़ैसे क़ह दूं क़ी,
इंतज़ार नहीं हैं...!

21 January 2026

10311 - 10315 ख़ाक़ दिल ज़ान आँख़ ज़ुदाई उम्र रात सदियाँ लज़्ज़त बसर क़स्में क़दम आहट फ़िराक़ इंतज़ार शायरी

 
10311
अब ख़ाक़ उड़ रही हैं,
यहाँ इंतज़ार क़ी...
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर,
क़िसी ज़ान-ए-ज़हाँ क़े थे ll

                                      ज़ौन एलिया

10312
ज़िसक़ी आँख़ोंमें क़टी थीं सदियाँ ,
उसने सदियोंक़ी ज़ुदाई दी हैं ll
गुलज़ार

10313
इक़ उम्र क़ट ग़ई हैं,
तेरे इंतज़ारमें...
ऐसे भी हैं क़ि क़ट न सक़ी,
ज़िनसे एक़ रात......

                                     फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

10314
ऐसे ही इंतज़ारमें,
लज़्ज़त अग़र न हो...
तो दो घड़ी फ़िराक़में,
अपनी बसर न हो......
रियाज़ ख़ैराबादी

10315
ज़िसे न आनेक़ी,
क़स्में मैं दे क़े आया हूँ ;
उसीक़े क़दमोंक़ी आहटक़ा,
हमे इंतिज़ार भी हैं !

                                          ज़ावेद नसीमी

20 January 2026

10306 - 10310 मोहब्बत बात धोख़ा हुदूद ऐतबार वादा इशारा दिलासा ख़याल इंतिज़ार इंतज़ार शायरी

 
10306
मोहब्बत तो दूरक़ी बात हैं, मेरी ज़ान...
धोख़ा मिलनेक़े बाद भी,
क़ोई मेरे ज़ैसा इंतज़ारभी क़रें...
तो बता देना।

10307
अब इन हुदूदमें लाया हैं,
इंतज़ार मुझे...
वो आ भी ज़ाएँ तो,
आए न ऐतबार मुझे...!
ख़ुमार बाराबंक़वी

10308
न क़ोई इशारा, न क़ोई दिलासा,
न क़ोई वादा, मग़र... 
ज़ब आई शाम,
तिरा इंतिज़ार क़रने लग़े........ 
                                                 वसीम बरेलवी

10309
इसी ख़यालमें,
हर शाम-ए-इंतज़ार क़टी ;
वो आ रहे हैं, वो आए,
वो आए ज़ाते हैं......
नज़र हैदराबादी

10310
ओ ज़ाने वाले, आ !
कि तेरे इंतज़ारमें,
रस्तेक़ो घर बनाए,
ज़माने गुज़र ग़ए...
                    ख़ुमार बाराबंक़वी

19 January 2026

10301 - 10305 दिल प्यार दिनबदल चीज़ संसार बेक़रार सोच आँख़ अशक़बार लुत्फ़ क़माल क़िताब मोहब्ब्त इंतज़ार शायरी

 
10301
बदलना, तय हैं हर चीज़़क़ा इस संसारमें...
बस इंतज़ार क़रो l
क़िसीक़ा बदलेग़ा 'दिल',
क़िसी क़े बदलेंग़े 'दिन' !!!

10302
दिल आज़ फ़िर बेक़रार हैं,
औरआँख़ भी अशक़बार हैं l
हर आहटपर चौंक़ उठता हूँ,
अभी तक़ उनक़ा इंतज़ार हैं ll

10303
"इंतज़ार - ए - यार" भी,
लुत्फ़ क़माल हैं...!!!
"आँख़ें" क़िताबपर और,
"सोच" ज़नाबपर...!!!

10304
सूख़ ग़ए फ़ूलपर बहार वहीं हैं,
दूर रहते हैं पर प्यार वहीं हैं
ज़ानते हैं हम मिल नहीं पा रहें हैं
आपसे मग़र इन आँख़ोंमें,
मोहब्ब्तक़ा इंतज़ार वहीं हैं

10305
मुझे बस इतना बता दो, 
इंतज़ार क़रू......
या बदल ज़ाऊ ?
तुम्हारी तरह......

17 January 2026

10296 - 10300 वक़्त दीवानग़ी आँख़ें बरस ख़त्म चाहत बेशुमार दर्द मज़ा मिलाप इंतज़ार शायरी

 
10296
दीवानग़ी इससे बढक़र,
और क़्या होग़ी, 
आज़ भी इंतज़ार हैं,
तेरे आनेक़ा ll

10297
क़ौन क़हता हैं,
वक़्त बहुत तेज़ हैं ;
तुम क़भी क़िसीक़ा,
इंतज़ार तो क़रक़े देख़ों…

10298
रहीं इंतज़ारमें आँख़ें और,
हम ख़ड़े रहें बरसों वहीं…
न इंतज़ार ख़त्म हुआ,
न चाहत क़म हुई…

10299
मेरी आँख़ोंमें यहीं हदसे,
ज़्यादा बेशुमार हैं l
तेरा हीं इश्क़ तेरा हीं दर्द,
तेरा हीं इंतज़ार हैं ll

10300
इंतज़ारमें ज़ो मज़ा हैं,
वो मिलापमें नहीं...
लेक़िन मिलाप ना हो तो,
इंतज़ारमें भी मज़ा नहीं ll

16 January 2026

10291 - 10295 दिल प्यार मोहब्बत तड़प मुश्क़िल बेवफ़ाई राह चाहत इंतज़ार सताना आशिक़ आँख़ मुक़र तड़प शायरी

 
10291
बेवफ़ाईक़ी राहोंमें,
मेरा प्यार बड़ा मुश्क़िलमें हैं...
मोहब्बतक़ी तड़प ज़ाग़ी,
आज़ भी मेरे दिलमें हैं...

10292
तड़पक़े देख़ो क़िसीक़ी चाहतमें,
तो पता चले क़ि इंतज़ार क़्या होता हैं...
यूँ ही मिल ज़ाये अग़र क़ोई बिना तड़पे,
तो क़ैसे पता चलेक़े प्यार क़्या होता हैं...

10293
इंतज़ार क़रक़े देख़ो,
क़िसीक़े प्यारमें,
तब पता चलेग़ी,
तड़प क़्या होती हैं !

10294
याद क़रक़े भूलना ही ना आया हमें,
क़िसीक़े दिलक़ो सताना ही ना आया हमें...
क़िसीक़े लिए तड़पना तो सीख़ लिया,
अपने लिए क़िसीक़ो तड़पाना ना आया हमें...

10295
आशिक़क़ो तेरे,
ऐसे क़्यों तड़पाना
आँख़ोंसे प्यार ज़ताक़र,
क़्यों मुख़से मुक़र ज़ाना

15 January 2026

10286 - 10290 दिल मोहब्बत दामन सावन बरस सख़ियाँ मिलन याद बसर अश्क़ चश्म साथ तड़प शायरी

 
10286
दामन छुड़ाक़े उनसे मैं,
ज़ाऊँ तो क़्या क़रूँ...
क़ैसे तड़प तड़पक़े,
बुलाएँ मोहब्बतें......!
                           मुसर्रत ज़बीं ज़ेबा

10287
क़्या सावन क़ैसी बरसातें,
क़्या सख़ियाँ क़्या मिलनक़ी रात...
रोता हैं दिल तड़प तड़प,
ज़ब याद पियाक़ी आती हैं......
उस्ताद वज़ाहत हुसैन ख़ाँ

10288
सुब्ह-ए-अज़लसे,
शाम-ए-अबद तक़ हैं एक़ दिन,
ये दिन तड़प तड़पक़े,
बसर क़र रहे हैं हम...
                                 रईस अमरोहवी

10289
अश्क़ आए ग़म-ए-शहसे,
ज़ो चश्म-ए-तरमें
दिल ज़लने लग़ा,
तड़प तड़पक़र बरमें...
अहमद हुसैन माइल

10290
क़भी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र,
नज़र आ लिबास-ए-मज़ाज़में...
क़ि हज़ारों सज़्दे तड़प रहें हैं,
मिरी ज़बीन-ए-नियाज़में.....
                                        अल्लामा इक़बाल

14 January 2026

10281 - 10285 ग़ुज़ार तमाम रात चैन हयात रुख़ शब तक़लीफ़ आराम हुस्न बात दिल ज़ुल्म तड़प शायरी


10281
क़्यूँक़र तड़प तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तमाम रात...
ये माज़रा उन्हें भी,
सुना लूँ तो चैन लूँ...
साहिर सियालक़ोटी

10282
मक्र-ए-हयात,
रुख़क़ी क़बा भी उतार दी ;
हमने तड़प तड़पक़े,
ये शब भी ग़ुज़ार दी ll
फ़रहान सालिम

10283
तक़लीफ़ दूर हो ग़ई,
आराम आ ग़या l
मरना तड़प तड़पक़े,
मिरा क़ाम आ ग़या ll
                                क़द्र ओरैज़ी

10284
रात तमाम हो ग़ई,
सिर्फ़ तक़ल्लुफ़ातमें...
इश्क़ तड़प तड़प उठा,
हुस्नक़ी बात बातमें......
मुस्तफ़ा हुसैन नय्यर

10285
रहता नहीं हैं रक़्ख़े,
थमता नहीं थमाए...
दिल अब तड़प तड़पक़र,
इक़ ज़ुल्म क़र रहा हैं......
                                     मीर तक़ी मीर

13 January 2026

10276 - 10280 सराफ़ील नज़र प्यार ठहर आँख़ें ज़ान तमन्ना तमाशा शब सुब्ह रात तड़प शायरी

 
10276
क़्या क़्या तड़प तड़पक़े,
सराफ़ील गिर पड़े...
दम आ ग़या जो सूरमें,
मुझ बेक़रारक़ा......
                            अहमद हुसैन माइल

10277
मैं उसक़ी ख़ास नज़रसे,
तड़प तड़प उठ्ठूँ l
वो इतने प्यारसे देख़ें,
ठहर ठहरक़े मुझे ll
अफ़रोज़ रिज़वी

10278
देता हूँ मैं इधर,
जी अपना तड़प तड़पक़र...!!
देख़ें हैं वो उधरक़ो,
आँख़ें चुरा चुराक़र......!!!
                                       ज़ुरअत क़लंदर बख़्श

10279
देवे हैं ज़ान,
मुर्ग़-ए-तमन्ना तड़प तड़प l
इस पर भी उसक़ो,
लुत्फ़-ए-तमाशा न आवे हैं ll
रुस्तम नामी

10280
रोज़-ओ-शबक़े क़ोह तराशें,
रोज़क़ा ये मा'मूल हुआ...
मर मरक़र अब सुब्ह क़रेंग़े,
तड़प तड़पक़र रात हुई ll
                                         सुलताना मेहर

12 January 2026

10271 - 10275 जीना मरना सिसक़ फ़रियाद ताक़त रूह बिज़लिय रुबाब चैन इंतिज़ार तड़प शायरी

 
10271
जीना तड़प तड़पक़र,
मरना सिसक़ सिसक़क़र...
फ़रियाद एक़ जी हैं,
क़्या क़्या ख़राबियोंमें...
                            सिराज़ औरंग़ाबादी

10272
पहुँचे तड़प तड़पक़े,
भी ज़ल्लाद तक़ न हम ;
ताक़तसे हाथ पाँव,
ज़ियादा हिला चुक़े ll
हैंदर अली आतिश

10273
क़ल्ब तड़प तड़प उठा,
रूह लरज़ लरज़ ग़ई l
बिज़लियाँ थीं भरी हुई,
ज़मज़मा-ए-रुबाबमें ll
                                असर सहबाई

10274
क़्यूँक़र तड़प तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तमाम रात...
ये माज़रा उन्हें भी सुना लूँ,
तो चैन लूँ...
साहिर सियालक़ोटी

10275
हाँ हाँ तड़प-तड़पक़े,
ग़ुज़ारी तुम्हींने रात...
तुमने हीं इंतिज़ार क़िया,
हमने क़्या क़िया...ll
                                    दाग़ देहलवी

11 January 2026

10266 - 10270 दिल ग़ोशा क़फ़स अरमाँ रिहाई ग़िला क़ातिल हौसला ख़ामोशी हाल सिसक़ि आशियाँ तड़प शायरी

 
10266
तड़प तड़पक़े हुआ,
ग़ोशा-ए-क़फ़समें तमाम...
दिल-ए-असीरमें,
अरमाँ रहा रिहाईक़ा ll
                           इनायतुल्लाह रौशन बदायूनी

10267
ग़िला क़िसे हैं क़ि,
क़ातिलने नीम-ज़ाँ छोड़ा...
तड़प तड़पक़े निक़ालूँग़ा,
हौसला दिलक़ा ll
यग़ाना चंग़ेज़ी

10268
और ग़िरक़र फ़र्शपें,
छनसे टूट ग़या तो...
तड़प तड़पक़र,
मर ज़ाएग़ी ख़ामोशी......
              मोहसिन आफ़ताब क़ेलापुरी

10269
मैं हाल अपना दोस्तो,
तुम्हें सुनाऊँ क़िस तरह...
तड़प तड़पक़े ज़ी रहा हूँ,
सिसक़ियोंक़े ज़ालमें......
यासिर ग़ुमान

10270
ज़ो मुर्ग़-ए-क़िबला-नुमा बनक़े,
आशियाँसे चले...
तड़प तड़पक़े वहीं रह ग़ए,
ज़हाँसे चले......
                                           शाद लख़नवी

10 January 2026

10261 - 10265 अरमान भड़क़ ख़ुद क़रार इशारे दीद सौदे तरीक़ सनम आस्ताँ इज़्तिराब तड़प शायरी

 
10261
तड़प तड़प न उठो,
आज़ मेरे अरमानो...
भड़क़ भड़क़क़े शरारो,
मुझे फ़रेब न दो ll

                             शहज़ाद अहमद

10262
न बे-क़रार हो,
तू मेरी बे-क़रारीपर...
तड़प तड़पक़े,
ख़ुद आ ज़ाएग़ा क़रार मुझे ll
ज़िग़र ज़ालंधरी

10263
तुम्हारी दीदक़े सौदेमें,
आ ग़या सौ बार ;
तड़प तड़पक़े,
दिल-ए-बे-क़रार आँखोंमें ll

                          मुंशी शिव परशाद वहबी

10264
ख़ुदा ख़ुदाक़े इशारेपें,
लौट लौट ग़या ;
तड़प तड़पक़े,
तरीक़-ए-सनम सनमपें चला ll
ज़ाफ़र ताहिर

10265
तड़प तड़पक़े,
तिरे आस्ताँपें ले आया ;
बड़ा असर,
दिल-ए-पुर-इज़्तिराबमें देख़ा ll
                                                    नज़र बर्नी

10256 - 10260 ज़िंदग़ी ज़माने ग़ुज़ारी वक़्त मुस्क़ुरा ज़ान शिक़ायत दामन प्यारमें अफ़्शाँ ज़ान याद तड़प शायरी

 
10256
तड़प तड़पक़े ग़ुज़ारी हैं,
ज़िंदग़ी मैने...
मुझे क़भी न मिला,
वक़्त मुस्क़ुरानेक़ा......

10257
तड़प तड़पक़े तो बिस्मिलने,
ज़ान तक़ दे दी ;
वो आब-ए-तेग़क़े दो घूँट भी,
पिला न सक़े......
नूर लुधियानवी

10258
तड़प तड़पक़े ग़ुज़ारे हैं,
रोज़-ओ-शब लेक़िन ;
क़भी ज़बाँसे शिक़ायत न क़ी,
ज़मानेक़ी......

                                         बृज़ेस तलअत निज़ामी

10259
तड़प तड़पक़े,
तिरे बिस्मिलोंने,
मक़्तलमें बढ़ाए हाथ मग़र,
दामन-ए-क़ज़ा न मिला......
नबीउल हसन शमीम

10260
तड़प तड़पक़े ज़िए ज़िसक़े,
प्यारमें 'अफ़्शाँ'...
उसीक़ी यादमें,
लो आज़ ज़ान भी दे दी...!

                                  अर्ज़ुमंद बानो अफ़्शाँ

8 January 2026

10251 - 10255 दिल बेक़रार ज़ुल्फ़ पैदा तमन्ना क़रवट हयात अंदाज़ ज़ान सहर ग़ज़ल अलामत शायरी


10251
तड़प तड़पक़े,
दिल-ए-बेक़रार रह ज़ाए...
क़ुछ और ज़ुल्फ़-ए-सियह,
पेंच-ओ-ताब पैदा क़र !!!
                       ख़लीलुल हुदा शारिक़ नियाज़ी

10252
तड़प तड़पक़े,
तमन्नामें क़रवटें बदलीं ;
न पाया दिलने हमारे,
क़रार सारी रात...
इम्दाद इमाम असर

10253
तड़प तड़पक़े,
सर-ए-दार मर ग़या क़ोई...
हयात क़हिए क़ि,
मरनेही क़ा हैं इक़ अंदाज़...!
                                           ख़ुर्शीद अलीग़

10254
तड़प तड़पक़े,
ज़हाँ मैने ज़ान दी हैं 'सिराज़'
ख़ड़े हुए थे वहींपर,
तमाशबीन बहुत......
सिराज़ फ़ैसल ख़ान

10255
तड़प तड़पक़े भी,
ज़िसक़ी सहर न हो पाए...
मिरी ग़ज़लभी,
उसी रातक़ी अलामत हैं...!
                                         मुख़्तार अंसारी

4 January 2026

10246 - 10250 मोहब्बत नफ़रत क़रवट ख़्वाब सवेरा रात क़यामत अश्क़ क़नार क़ब्र तड़प शायरी

 
10146
मुझे नफ़रत हैं,
इस मोहब्बतक़े नामसे l
क़्यूँ बिना क़सूर,
तड़पा तड़पाक़र मारा हैं मुझे ll

10247
बदले न क़रवटें भी,
क़ोई फ़र्श-ए-ख़्वाबपर...
ग़मसे तड़प तड़पक़े,
सवेरा क़रे क़ोई......?
शोला क़रारवी

10248
क़िस शब तड़प तड़पक़े,
न क़ाटी तमाम शब ;
क़िस रोज़ मेरे घरपें,
क़यामत नहीं रहीं !
                       नादिर शाहज़हाँ पुरी

10249
पिरोए अश्क़ोंक़े,
रोरोक़े हार ग़ोरीने l
तड़प-तड़पक़े ग़ुज़ारी,
बहार ग़ोरीने ll
तुफ़ैल होशियारपुरी

10250
क़नार-ए-ग़ैरमें,
रातें तड़प तड़पक़े क़टीं ;
रहे न चैनसे वो,
क़ब्रमें सुलाक़े मुझे...!
                                   रियाज़ ख़ैराबादी

3 January 2026

10241 - 10245 पहलू क़ुंज़-ए-क़फ़स बाल-ओ-पर ख़ामोश दिल सुक़ून इज़्तिराब बेरुख़ी याद नाम ढूँढ शब-ए-इंतिज़ार शायरी

 
10241
तड़प हीं तड़प रह ग़ई,
सिर्फ़ बाक़ी...
ये क़्या ले लिया,
मेरे पहलूसे तूने...?
                               मुज़्तर ख़ैराबादी

10242
क़ुंज़-ए-क़फ़स दिया हैं,
तो इतनी सक़त भी दे ;
तोड़ें तड़प तड़पक़े,
हर इक़ बाल-ओ-परक़ो हम !
नज़ीर हुसैन सिद्दीक़ी

10243
आख़िर तड़प तड़पक़े,
ये ख़ामोश हो ग़या...
दिलक़ो सुक़ून मिल ही गया,
इज़्तिराबमें l
                                    साहिर होशियारपुरी

10244
फ़िर उसे अपनी,
हर बेरुख़ी याद आए...
तड़प तड़पक़े वो,
नाम मेरा दोहराए...
मुअज़्ज़मा नक़वी

10245
मैं ढूँढता हूँ क़िसे,
बार-बार क़्या क़हिए ?
तड़प तड़पक़े शब-ए-इंतिज़ार,
क़्या क़हिए......!
                                    क़ाज़ी ज़लाल हरीपुरी

2 January 2026

10236 - 10240 ख़िलौने सड़क़ ज़बीन-ए-नियाज़ ज़ुल्फ़ दिल फ़रियाद आँख़ ड़र आँसू उल्फ़त क़सम ज़ालिम तड़प शायरी


10236
ख़िलौनेक़ी तड़पमें,
ख़ुद ख़िलौना वो बन ज़ाए ;
मिरा बच्चा सड़क़पर,
रोज़ग़ारी लेक़े निक़ला हैं ll

                                             रऊफ़ ख़ैर


10237
सज़्दे तड़प रहें हैं,
ज़बीन-ए-नियाज़में,
सर हैं क़िसीक़ी ज़ुल्फ़क़ा,
सौदा लिए हुए......
अदा ज़ाफ़री


10238
दिल तड़पता हैं फ़रियाद क़रक़े,
आँख़ ड़रती हैं आँसू बहाक़े...
ऐसी उल्फ़तसे वो ज़ाते ज़ाते,
मुझक़ो अपनी क़सम दे ग़ए हैं ll


10239
ज़लती हुई ज़मींपें,
तड़पने लग़े इमाम...
बेक़सपें ज़ालिमोंने,
क़िया और इज़्दिहाम...
मीर अनीस


10240
मज़ा हैं तिरे बिस्मिलोंक़ो तड़पमें,
तड़पमें नहीं बिस्मिलोंमें मज़ा हैं ll

                                                   क़ैफ़ी हैंदराबादी

1 January 2026

10231 - 10235 दिल समझ बेसबब इश्क़ लत नावक़-ए-ज़फ़ा निग़ाह शोर ख़बर दाएरे क़र्ब तड़प शायरी


10231
बेसबब 'राग़िब',
तड़प उठता हैं दिल...
दिलक़ो समझाना पड़ेग़ा,
ठीक़से......
                           इफ़्तिख़ार राग़िब

10232
ये इश्क़ भी एक़ लत हैं,
बहुत तड़पाता हैं....
दिलभी नहीं लग़ता,
ज़ब दिल क़हीं लग़ ज़ाता हैं...
कुँवर मुजतबा

10233
तड़प रहा हैं दिल,
इक़ नावक़-ए-ज़फ़ाक़े लिए ;
उसी निग़ाहसे फिर,
देखिए ख़ुदाक़े लिए ll
                               लाला माधव राम जौहर

10234
इस शोरने तड़पा दिया,
हज़रतक़े ज़िग़रक़ो l
अक़बरसे क़हा ज़ाओ तो,
अम्मोक़ी ख़बरक़ो ll
मिर्ज़ा सलामत अली दबीर

10235
दिलक़ी मौजोंक़ी तड़प,
मेरी सदामें आए...
दाएरे क़र्बक़े फैले तो,
हवामें आए ll
                                 आसिफ़ साक़िब

31 December 2025

10226 - 10230 उलझ तौबा दाम रहमत इल्ज़ाम बहार क़फ़स बेताब ज़ख़्म रास्ते दिल हूबहू तड़प शायरी


10226
क़हर ढाएग़ी असीरोंक़ी तड़प,
औरभी उलझेंग़े हल्क़े दामक़े...
                                              हफ़ीज़ जौनपुरी

10227
तड़पक़र मैने तौबा तोड़ ड़ाली,
तिरी रहमतपें इल्ज़ाम आ रहा था
अब्दुल हमीद अदम

10228
तड़पक़े रह ग़ई,
बुलबुल क़फ़समें ऐ सय्याद ;
ये क़्या क़हा क़ि,
अभी तक़ बहार बाक़ी हैं ll
                                  बेताब अज़ीमाबादी

10229
सोयी हुई तड़पक़ो,
फ़िरसे ज़ग़ा रहा हैं l
क़हता तो क़ुछ नहीं हैं,
बस याद आ रहा हैं ll
फ़रीहा नक़वी

10230
तड़प रहा हैं,
जो बेताब होक़े ज़ख़्मोंसे...
ये रास्तेमें मिरे,
दिलक़े हूबहू क़्या हैं...?
                  शाद फ़िदाई देहलवी

30 December 2025

10221 - 10225 दिल मोहब्बत चाहत याद सुबह रात दर्द अश्क तन्हाई मौत ज़िंदग़ी सहारे सनम तड़प शायरी


10221
तड़पक़र ग़ुज़र ज़ाएग़ी,
यह रातभी आखिर,
तुम याद नहीं क़रोग़े,
तो क़्या सुबह नहीं होग़ी ?

10222
बस दर्द अश्क तन्हाई और तड़प,
क़्या क़रेग़ी मौत मेरी ज़िंदग़ी लेक़र?

10223
तेरी यादोंक़े सहारे हीं तो,
ज़िन्दा हैं हम,
वरना क़बक़े तड़पते हुए,
मर ज़ाते हम !

10224
उनक़ी यादमें,
सारी रात तड़पते रहे,
वो न आनेसे रहे,
और ना हम बुलानेसे !
10225
मोहब्बत क़रक़े तो देख़ो तुम,
तड़प ना ज़ाओ तो क़हना ll