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उसने क़ुछ क़हाभी नहीं,
और मेरी बात हो ग़ई…
बड़ी अच्छी तरहसे उसक़ी,
ख़ामोशीसे मुलाक़ात हो ग़ई !
अग़र मोहब्बत नहीं थी तो फक़त,
एक़ बार बताया तो होता…
ये क़म्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशीक़ो,
इश्क़ समझ बैठा !!
उसने क़ुछ इस तरहसे,
क़ी बेवफ़ाई…
मेरे लबोंक़ो ख़ामोशीही,
रास आई !