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इक़ तड़प मौज़-ए-तह-नशींक़ी तरह,
ज़िंदग़ीक़ी बिना-ए-मोहक़म हैं ll
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी
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क़ुछ देख़ रहे हैं,
दिल-ए-बिस्मिलक़ा तड़पना...
क़ुछ ग़ौरसे क़ातिलक़ा,
हुनर देख़ रहे हैं...!
दाग़ देहलवी
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ज़ुदाईमें तेरी,
क़ुछ ऐसेभी ज़ुदाईआते हैं...
सेज़ोंपें भी तड़पा करता हूँ,
क़ाँटोंपें भी राहत होती हैं...ll
सबा अफ़ग़ानी