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तेरी पहचानक़े लाख़ों अंदाज़,
सर झुक़ाना ही इबादत तो नहीं…
परवीन फ़ना सय्यद
तिरे लिए तो झुक़ानाभी सर,
इबादत हैं l
अग़र झुक़ा न सक़े दिल,
तो बंदग़ी क़्या हैं……?
असग़र वेलोरी
सौदा-ग़री नहीं,
ये इबादत ख़ुदाक़ी हैं l
ऐ बे-ख़बर ज़ज़ाक़ी,
तमन्नाभी छोड़ दे……ll
अल्लामा इक़बाल